सवाई माधोपुर

सवाईमाधोपुर नगर निकाय चुनाव: निर्दलीयों के हटते ही बदले चुनावी समीकरण, कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने

सवाईमाधोपुर नगर निकाय चुनाव: नाम वापसी के अंतिम दिन प्रत्याशियों की ओर से नाम वापस लिए जाने के बाद चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। कुल 72 प्रत्याशियों ने चुनावी मैदान से अपना नाम वापस लिया है।
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Updated: 4 Sep 2026, 1:06 PM IST
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सवाईमाधोपुर. नाम वापस लेने वाले प्रत्या​शियों का चुनाव प्रभारी मदन प्रजापत गुलदस्ता भेंट करते अ​भिनंदन करते हुए। Photo- Patrika

सवाईमाधोपुर। नगर निकाय चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के बाद चल रही असमंजस की स्थिति अब खत्म हो गई है। नाम वापसी के अंतिम दिन गुरुवार को प्रत्याशियों की ओर से नाम वापस लिए जाने के बाद चुनावी मैदान की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। कुल 72 प्रत्याशियों ने चुनावी मैदान से अपना नाम वापस लिया है। इनमें 70 निर्दलीय प्रत्याशी और वार्ड नं.14 व 45 से आम आदमी पार्टी का दो प्रत्याशी शामिल है। अब नाम वापसी के बाद सभी वार्डों में चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

नाम वापसी के साथ ही अब यह भी स्पष्ट हो गया है कि किस वार्ड में कितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हैं और कहां मुकाबला बहुकोणीय रहेगा। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों के हटने से भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बनने की संभावना मजबूत हुई है। वहीं कुछ वार्डों में अब भी कई प्रत्याशी मैदान में होने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय रहने के आसार हैं।

निर्दलीयों के हटने से बदले समीकरण

नाम वापसी के दौरान बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान से हटने का सीधा असर वार्डों के चुनावी समीकरणों पर दिखाई दे सकता है। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना रहे थे। अब इनके हटने के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच मुकाबला अधिक सीधा होने की स्थिति बनी है। हालांकि, जिन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी अभी भी मैदान में हैं, वहां राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के लिए चुनौती बनी रहेगी। ऐसे वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी किस दल के वोट बैंक में सेंध लगाते हैं, यह चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

अब मतदाताओं पर फोकस

नाम वापसी पूरी होने के बाद राजनीतिक दलों का पूरा फोकस अब मतदाताओं पर रहेगा। प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ वार्डों में सक्रिय होकर मतदाताओं का रुख अपने पक्ष में करने का प्रयास करेंगे। वहीं वार्डवार चुनावी समीकरणों को देखते हुए दलों की ओर से भी स्थानीय स्तर पर रणनीति में बदलाव किया जा सकता है।

अब चुनावी मैदान में डटे प्रत्याशियों की वास्तविक परीक्षा शुरू होगी। नामांकन और नाम वापसी के बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसमें आने वाले दिनों में प्रचार, व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशियों की पकड़ चुनावी मुकाबले की दिशा तय करेंगे।

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