Sawai Madhopur Human Angle story: राजकीय रेलवे पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक गर्भवती महिला की जान बचाई।
सवाईमाधोपुर। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए रेलवे पुलिस ने एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की जान बचा ली। ट्रेन में सफर के दौरान अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन मौके पर मौजूद जीआरपी टीम ने तुरंत मदद करते हुए महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। हालात गंभीर होने पर एक कांस्टेबल ने आगे बढ़कर रक्तदान किया, जिससे मां और बच्चे की जान बच सकी।
जीआरपी थानाधिकारी हरिमन मीणा ने बताया कि रविवार रात को आरती देवी नामक महिला ट्रेन से जयपुर से मुंबई जा रही थी। यात्रा के दौरान अचानक उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। हालात गंभीर देख महिला को सवाईमाधोपुर रेलवे स्टेशन पर उतारा गया और एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया।
चलती ट्रेन में अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। महिला दर्द से कराह रही थी और आसपास मौजूद लोग मदद के लिए जुट गए। इसी बीच सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस टीम हरकत में आई और तुरंत स्थिति संभालते हुए महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की, जहां समय रहते इलाज मिलने से बड़ा हादसा टल गया।
अस्पताल में उपचार के दौरान महिला को तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ी। इस पर जीआरपी कांस्टेबल दाताराम ने तुरंत रक्तदान किया, जिससे महिला का इलाज सुचारू रूप से हो सका। समय पर रक्त मिलने से महिला सुरक्षित प्रसव कर सकी और रात 9 बजकर10 मिनट पर एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया।
कांस्टेबल दाताराम के इस सराहनीय कदम की अस्पताल स्टाफ और आमजन ने प्रशंसा की। पुलिस की इस मानवीय पहल ने एक बार फिर साबित किया कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर समाज के लिए जीवनरक्षक भूमिका भी निभाती है।
राजस्थान में इससे पहले भी चलती ट्रेन में प्रसव पीड़ा के मामले सामने आ चुके है। पिछले साल 8 दिसंबर को जयपुर से अलवर जा रही भुज-बरेली ट्रेन में नवजात की किलकारी गूंजी थी। दौसा रेलवे स्टेशन से पहले ही एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो डिब्बे में मौजूद यात्रियों ने तुरंत मदद की थी।
कृषि विभाग के कर्मचारी एवं महुवा सीएचसी में कार्यरत नर्सिंगकर्मी ममता मीणा भी उसी डिब्बे में सफर कर रही थीं। हालात को देखते हुए वे तुरंत महिला के पास पहुंची और टीटी की मदद से ब्लेड जैसी आवश्यक व्यवस्था कर महज पांच मिनट में सुरक्षित प्रसव कराया। आसपास बैठी महिलाओं ने भी सहयोग कर वातावरण को सुरक्षित बनाया।