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MSP Crop: टोंक में समर्थन मूल्य पर सरसों-चने की खरीद के लिए बनाए 30 केंद्र, ऑनलाइन पंजीयन 20 मार्च से

Tonk News: टोंक जिले में समर्थन मूल्य पर सरसों व चने की खरीद होगी। राजफैड की ओर से एक अप्रेल से सरसों व चने की खरीद करवाने की तैयारी है।

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टोंक

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Anil Prajapat

Mar 17, 2026

Mustard

कृषि उपज मंडी में सरसों। पत्रिका फाइल फोटो

Tonk News: टोंक जिले में समर्थन मूल्य पर सरसों व चने की खरीद होगी। राजफैड की ओर से एक अप्रेल से सरसों व चने की खरीद करवाने की तैयारी है। समर्थन मूल्य पर सरसों व चना बेचने के लिए किसान 20 मार्च से ऑनलाइन पंजीयन करा सकेंगे। इसको लेकर 30 केंद्र बनाए गए है। इसमें 10 क्रय विक्रय सहकारी समिति व 20 केंद्र जीएसएस केंद्र शामिल है। सरकार ने सरसों का 6200 रुपए तथा चने का 5875 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है।

उल्लेखनीय है कि सरसों कटाई करने के साथ किसान तैयार सरसों को घर ले जाने के स्थान पर मंडियों में लेकर पहुंचने लगे है। मंडी में नई सरसों 6140 से 6364 रुपए प्रति क्विटल तक खरीद हो रही है। इसके पीछे ये कारण है कि अभी सरसों गीली है। जिले में 4 लाख 71 हजार हैक्टेयर में रबी बुवाई हुई है। इसमें सर्वाधिक 2 लाख 70 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई हुई है।

5.25 लाख हैक्टेयर में होती फसल

सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार रवींद्र सिंह यादव ने बताया कि जिले में कुल खेती का रकबा 7 लाख 17 हजार हैक्टेयर है। इसमें से 5 लाख 25 हजार हैक्टेयर में फसल होती है। रबी की बुवाई 4 लाख 65 हजार 785 हैक्टेयर में हुई है। अन्य रकबों में सब्जी समेत अन्य फसल होती है। जिले में कुल किसान 3 लाख 25 है।

किसान जुटे हैं कटाई में

इन दिनों किसान फसल कटाई में जुटे हुए हैं। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि मंडी में फसल अप्रेल के पहले सप्ताह से आनी शुरू हो जाएगी। वहीं किसानों को दूसरी तरफ मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर भी चिंता सता रही है। इसके चलते भी वे फसल कटाई को पूरा करने में लगे हैं।

बादल छाने से अन्नदाता को होने लगी चिंता

इधर, पचेवर क्षेत्र में आसमान में बादल छाने के साथ ही किसानों की चिंता बढ़ गई है। इन दिनों खेतों में सरसों और चने की फसल की कटाई जोर-शोर से चल रही है। ऐसे में मौसम के बदलते मिजाज को देखकर किसान जल्द से जल्द फसल समेटने में जुटे हुए हैं।

किसानों ने बताया कि बादल छाने के साथ ही मजदूरों की मजदूरी दर भी बढ़ गई है। पहले जहां मजदूरी करीब पांच सौ रुपए के आसपास थी, वहीं अब इससे अधिक मांग की जा रही है। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। क्षेत्र के पारली, आवड़ा, मलिकपुर, सेलसागर, किरावल, चावंडिया, सूरसागर, अंबापुरा, नगर, बरोल, सांस, कुराड़, बापडून्दा, बनेडिया चारणान, स्याह सहित आसपास के गांवों और ढाणियों में किसान परिवार खेतों में लावणी कर फसल समेटने में जुटे नजर आए।