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राजस्थान के इस जिले में 200 बांध-तालाब बनेंगे रोजगार का बड़ा जरिया, हर साल 10.50 करोड़ का राजस्व

टोंक जिले में बांध और तालाबों के रखरखाव को लेकर लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद इनकी जिम्मेदारी पहले तो सरकार ने ग्राम पंचायत से सिंचाई विभाग को दे दी।

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टोंक

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kamlesh sharma

Mar 14, 2026

टोंक. बीसलपुर बांध पर चल रहा मत्स्य पालन का कार्य। फोटो पत्रिका

टोंक जिले में बांध और तालाबों के रखरखाव को लेकर लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद इनकी जिम्मेदारी पहले तो सरकार ने ग्राम पंचायत से सिंचाई विभाग को दे दी। अब मत्स्य का टेंडर समेत मत्स्य पालन का जिम्मा मत्स्य विभाग के पास आ गया है। ऐसे में जिले के सभी बांध-तालाब में मत्स्य टेंडर से संबंधित काम अब मत्स्य विभाग करेगा। जबकि देखरेख का जिम्मा सिंचाई विभाग का होगा।

पहले यह सब जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की ही थी। लेकिन उनसे देखरेख ही नहीं हो पाई। ऐसे में यह बदलाव किया गया है। गौरतलब है कि जिले के बांध और तालाब पहले सिंचाई विभाग के पास थे। लेकिन ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए इनमें मत्स्य पालन और देखरेख की जिम्मेदारी वर्ष 2003 में तालाब और बांधों को पंचायतों के सुपुर्द कर दिया था।

पंचायतों से लगातार मिल रही थीं शिकायतें

जिले की ग्राम पंचायतों की ओर से कई बार शिकायतें सामने आई थीं कि पंचायत राज विभाग के स्तर पर बांध और तालाबों का समुचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है। कई जगहों पर पाल क्षतिग्रस्त होने, गाद भरने और पानी की निकासी व्यवस्था ठीक नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वहीं मत्स्य पालन के टेंडर में भी अनियमितताओं की शिकायतें थी। इन समस्याओं को देखते हुए अब जिम्मेदारी का पुनर्वितरण किया गया है।

विकसित करने की योजना

टोंक जिले में वर्तमान में करीब 200 बांध और बड़े तालाब हैं, जो सिंचाई और जल संरक्षण के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा जिले में करीब 250 छोटे तालाबों को भी चिह्नित कर उन्हें विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे मत्स्य पालन की योजना है।

जिले के बांध और तालाब मत्स्य पालन के लिए भी महत्वपूर्ण स्रोत है। वर्तमान में टोंक जिले में मत्स्य पालन से हर साल 10 करोड़ 50 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। यदि इन जलाशयों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए तो मत्स्य उत्पादन और राजस्व दोनों में बढ़ोतरी की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए मत्स्य विभाग को इस क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जा रही है।

जल संरक्षण के कार्यों में तेजी

विशेषज्ञों का मानना है कि जिम्मेदारी तय होने से जल संरक्षण के कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही मत्स्य पालन के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में मछली उत्पादन बढऩे से किसानों और मत्स्य पालकों की आय में भी इजाफा होने की उम्मीद है।

अलग-अलग प्रक्रिया

मत्स्य पालन के लिए टेंडर की अलग-अलग प्रक्रिया है। सालाना 5 लाख रुपए से अधिक राजस्व वाले बांधों का टेंडर राज्य सरकार करती है। इसमें जिले के बीसलपुर, चंदलाई समेत अन्य बांध है। इनकी संख्या जिले में 60 है। यह ए श्रेणी में है। जबकि इससे नीचे 50 हजार से 5 लाख रुपए तक में बी और इससे कम में सी और डी क्षेणी के 140 बांधों का टेंडर अब मत्स्य विभाग अपने स्तर पर ही करेगा।

मानसून भी रहा मेहरबान

जिले में गत सालों से मानसून भी मेहरबान है। जिले के सभी बांध और तालाब पानी से लबालब है। ऐसे में पेयजलय, सिंचाई और मत्स्य पालन में लोगों को फायदा मिलेगा।

इनका कहना है

सरकार ने तालाब और बांधों में मत्स्य पालन की जिम्मेदारी में बदलाव किया है। अब मत्स्य विभाग ही ग्राम पंचायतों के बांध और तालाब में टेंडर जारी करेगा।
मेघचंद मीणा, सहायक मत्स्य विकास अधिकारी टोंक