रणथम्भौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर रविवार दोपहर का नजारा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए किसी अद्भुत अनुभव से कम नहीं रहा। जंगल की गहराइयों से निकलकर युवा टाइगर आरबीटी-2511 मलंग अचानक सड़क पर आ गया।
सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर रविवार दोपहर का नजारा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए किसी अद्भुत अनुभव से कम नहीं रहा । जंगल की गहराइयों से निकलकर युवा टाइगर आरबीटी-2511 मलंग अचानक सड़क पर आ गया। अटल सागर से होते हुए वह मिश्रदर्रा गेट की ओर बढ़ा और सिंह द्वार गेट पर जाकर बैठा। करीब दस मिनट तक उसकी मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र और पर्यटकों को रोमांचित कर दिया।
वाहनों की कतार अचानक थम गई। एक टैक्सी नंबर कार मलंग को पार कर आगे निकल गई, लेकिन बाकी वाहन वहीं रुक गए। श्रद्धालु और पर्यटक सांसें थामे इस दृश्य को निहारते रहे । मंदिर मार्ग पर बाघ की मौजूदगी ने श्रद्धालुओं के लिए आस्था और रोमांच का अनोखा संगम रच दिया।
दस मिनट तक श्रद्धालु व पर्यटक बाघ को निहारते रहे। मलंग रणथम्भौर की चर्चित बाघिन टी-107 सुल्ताना का बेटा है और पार्क का एक युवा बाघ है। इससे पहले भी वह मिश्रदर्रा गेट के आसपास कई बार नजर आ चुका है । रविवार की दोपहर उसकी मौजूदगी ने न केवल पर्यटकों को यादगार साइटिंग दी बल्कि मंदिर मार्ग को चर्चा का केंद्र बना दिया।
इससे पहले भी 27 मार्च को टाइगर ‘मलंग’ मंदिर मार्ग पर आ गया था। करीब 2 घंटे तक सड़क पर ही बैठा रहा। इस दौरान पर्यटकों से भरी जिप्सी और कैंटर की लंबी कतार लग गई थी । एहतियात के तौर पर तब पर्यटक और मंदिर दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की आवाजाही बंद कर दी गई थी, जिससे लंबा जाम लग गया था। हालांकि टाइगर के वापस जंगल में जाने पर पर्यटकों की गाड़ियां निकली ।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में रणथम्भौर में क्षमता से अधिक बाघ बाघिन विचरण कर रहे है और इसके कारण बाघों का मूवमेंट वर्तमान में त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर अधिक हो रहा है। जिस बाघ बाघिनों का आम तौर पर मंदिर मार्ग पर मूवमेंट देखने को मिलता है उनमें बाघ टी-2511 यानि मलंग,बाघिन सुल्ताना यानि टी-107, बाघ टी-101, बाघ टी-120 यानि गणेश आदि शामिल हैं।