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Sawai Madhopur: मजदूर की बेटी ने सुरों से लिखी सफलता की कहानी, गरीबी को हराकर बनाई राष्ट्रीय पहचान

सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी की काजल जादो ने गरीबी और संघर्ष के बीच संगीत को अपना सहारा बनाया। मजदूर पिता की बेटी ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पहचान बनाकर कई सम्मान हासिल किए और युवाओं के लिए प्रेरणा बनी।

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kajal jado success story

काजल जादो। फोटो। पत्रिका

सवाईमाधोपुर। गंगापुर सिटी की संगीतमयी बेटी काजल जादो संघर्ष से सुरों की रोशनी बनकर उभरी है। गरीबी और संघर्ष के बीच उसने संगीत की दुनिया में कदम रखा। घर की तंग दीवारें, रोजमर्रा की मुश्किलें और अभावों की चुभन । सबके बीच काजल ने अपने सपनाको दव का दिया। भूख और तंगी के साए में भी उन्होंने सुरों को अपना सहारा बनाया। यही सुर उनके आंसुओं की आवाज बने और वही सुर आज उन्हें पहचान दिला रहे हैं।

यह सफर आंसुओं, संघर्ष और दर्द से भरा रहा, लेकिन उनकी आवाज ने हर दर्द को ताकत में बदल दिया। काजल की कहानी बताती है कि जब हालात इंसान को तोड़ने की कोशिश करते हैं, तब हिम्मत और हुनर उसे और मजबूत बना देते हैं। पिता महेंद्र रोजाना मजदूरी कर परिवार का पेट पालते है, मां गुड्डी देवी गृहिणी हैं।

अभावों में पल रही उम्मीद

काजल का बचपन अभावों से घिरा रहा। पढ़ाई और संगीत दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। गरीबी की चुभन को उन्होंने सुरों की साधना में बदल दिया और हर कठिनाई को अपनी ताकत बना लिया। उनके लिए संगीत केवल कला नहीं, बल्कि जीवन का सहारा था।

जीत से मिली रोशनी

सत्र 2018-19 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की प्रतियोगिता में संपूर्ण राजस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त करना उनके लिए केवल जीत नहीं थी, बल्कि यह उस दर्द का जवाब था जो हालात ने दिया था। यह उपलब्धि उनके संघर्ष की पहली बड़ी जीत बनी और उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। यह सम्मान उनके लिए उस रोशनी की तरह था, जिसने अंधेरे हालात को पीछे छोड़ दिया।

छोटे शहर से मिली बड़ी पहचान

वर्ष 2024 में अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता में सम्मान प्राप्त करना उनके लिए एक सपना था। गरीबी से जूझते परिवार की बेटी ने जब राष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज़ से पहचान बनाई, तो यह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गई। उनकी आवाज ने यह साबित कर दिया कि छोटे शहरों से निकली प्रतिभा भी पूरे देश में गूंज सकती है।

हर पुरस्कार में छिपा संघर्ष

यूथ आइकॉन से लेकर समाज गौरव अवार्ड तक, काजल को मिले हर सम्मान में उनके दर्द और संघर्ष की कहानी छिपी है। हर पुरस्कार उनके आंसुओं और मेहनत का प्रमाण है। यह सम्मान केवल पदक नहीं, बल्कि उस संघर्ष की गवाही है जिसने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया। हर बार मंच पर सम्मानित होना उनके लिए उस दर्द की जीत थी जिसे उन्होंने सुरों में बदल दिया।

कई जगह सम्मानित

केंद्रीय मंत्री और राज्य की पूर्व कैबिनेट मंत्री से सम्मानित होना इस बात का सबूत है कि काजल ने न केवल अपने परिवार का दर्द कम किया, बल्कि पूरे सवाई माधोपुर का नाम रोशन किया। उनकी आवाज अब केवल गीत नहीं, बल्कि संघर्ष की गाथा बन चुकी है। यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालात में भी अपने सपनों को साकार करना चाहता है।

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