सवाई माधोपुर

रणथंभौर आने वाले पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर, टिकट प्रक्रिया में हुआ बड़ा बदलाव

Ranthambore: रणथंभौर में पर्यटकों को सुविधा मुहैया कराने के लिए वन विभाग की ओर से टिकट प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
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Ranthambore tiger reserve
रणथम्भौर राष्ट्रीय पार्क (फोटो-पत्रिका)

सवाईमाधोपुर। रणथंभौर बाघ परियोजना में हाल ही शुरू हुए नए पर्यटन सत्र के दौरान पर्यटकों को सुविधा मुहैया कराने के लिए वन विभाग की ओर से टिकट प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।

जिसके तहत अब टिकट या बोर्डिंग पास के लिए पर्यटकों को आवासन मण्डल मार्ग स्थित वन विभाग की बुकिंग विंडो पर आने की दरकार नहीं हैं। वन विभाग की ओर से पर्यटकों की सुविधा के लिए अब बोर्डिंग पास को पर्यटकों और संबंधित वाहन चालक और गाइड के मोबाइल नम्बर पर भेजा जा रहा है।

कतार में इंतजार से मिली निजात

पूर्व में रणथंभौर में टिकट बुक कराने या फिर बोर्डिंग पास प्राप्त करने के लिए पर्यटकों को वन विभाग की बुकिंग विंडो पर जाना अनिवार्य होता था। ऐसे में भीड़ अधिक होने पर कई बार पर्यटकों को घंटों तक कतार में इंतजार करना पड़ता था। ऐसे में पर्यटकों को परेशानी होती थी। साथ ही कई बार सॉफ्टवेयर का सिस्टम डाउन होने के कारण भी बोर्डिंग पास और टिकट जारी नहीं हो पाता था। ऐसे में वन विभाग की ओर से पीली पर्ची पर हाथ से टिकट जारी कर पर्यटकों को पार्क भ्रमण पर भेजा जाता था।

चैकिंग दल को भी मिली राहत

पार्क भ्रमण के दौरान अनियमितताओं को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से समय-समय पर पार्क भ्रमण पर गए पर्यटकों, पर्यटन वाहनाें आदि की जांच की जाती है। पूर्व में जांच के दौरान सभी पर्यटकों की आईडी और टिकटों की जांच की जाती थी। इसमें काफी समय लग जाता था। विभाग की ओर से जांच का कार्य अब भी किया जा रहा है, लेकिन स्कैनर मशीन का उपयोग करने और मोबाइल पर मैसेज को देखने से यह काम जल्दी और सुगम हो गया है। इससे पर्यटकों के साथ साथ जांच दल को भी राहत मिली है।

इनका कहना है…

अब बोर्डिंग पास या टिकट के लिए पर्यटकों को विंडो पर आने की जरूरत नहीं है, जहां तक कि वीआईपी कोटे के तहत भ्रमण पर जाने वाले पर्यटकों के टिकट भी अब पर्ची पर जारी नहीं किए जा रहे हैं। इसके लिए संबंधित पर्यटक, गाइड और वाहन चालक के मोबाइल पर ऑनलाइन मैसेज आ रहा है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है।
-प्रमोद कुमार धाकड़, उपवन संरक्षक (पर्यटन), रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।

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