Budhni Tractor Trolley Fire: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही ड्राइवर को आग का अहसास हुआ, उसने चलती गाड़ी से छलांग लगा दी।यहां पढ़ें विस्तार से
Budhni Tractor Trolley Fire: सीहोर जिले के बुधनी के देवगांव के पास बुधवार सुबह एक भीषण हादसा होते-होते टल गया। नेशनल हाईवे पर दौड़ती एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक 'चलता-फिरता आग का गोला' बन गई। ट्रॉली में धान की पराली (प्याल) भरी हुई थी, जिसमें अज्ञात कारणों से आग लग गई। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप ले लिया और पूरी ट्रॉली जलकर खाक हो गई। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में ऐसी घटना की आशंका व्यक्त की जा रही थी, क्योंकि बड़ी संख्या में किसान पराली को काटकर बगैर तिरपाल से ढंके ही ट्रॉलियों को ले जा रहे थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही ड्राइवर को आग का अहसास हुआ, उसने चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। समय रहते कूदने की वजह से उसकी जान बच गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझाया जा सका, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। हाईवे पर धू-धू कर जलती ट्रॉली को देखकर राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। दोनों तरफ से आने वाले वाहन रोक दिए गए थे। इस दौरान वाहनों की कतारें लग गई थी।
बुधनी और आसपास के इलाकों में इन दिनों धान की कटाई के बाद पराली का परिवहन जोरों पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरलोडिंग ट्रॉलियों में क्षमता से कहीं ज्यादा पराली ऊपर तक भरी जा रही है। ऊँचाई ज्यादा होने के कारण सड़कों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों से घर्षण या शॉर्ट सर्किट का खतरा हमेशा बना रहता है।
बताया गया है कि न तो पराली को तिरपाल से ढंका जा रहा है और न ही अग्नि सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं। अगर समय रहते इन ओवरलोड ट्रॉलियों पर लगाम नहीं कसी गई, तो बुधनी की सड़कों पर 'द बर्निंग ट्रैक्टर' जैसी घटनाएं फिर से बड़ी हानि का कारण बन सकती हैं। आग लगने का कारण फिलहाल अज्ञात है, पुलिस मामले की जांच कर रही है।
0-सीहोर जिले के बुधनी में धू-धू कर जली पराली से भरी ट्रॉली
0-चलता-फिरता आग का गोला बना ट्रैक्टर0-
0-ट्रैक्टर के ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान
0-जलती ट्रॉली देख थम गया ट्रैफिक
0-दोनों तरफ लग गई वाहनों की कतारें
0-ओवरलोडिंग ट्रॉलियों की हर दिन आ रही शिकायतें
0-पराली को तिरपाल से नहीं ढंकते किसान
0-ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता जरूरी