MP News: अवैध खनन रोकने पहुंची महिला DFO और वन टीम पर सरेआम हमला किया गया। रेंजर को घसीटा गया, वर्दी फाड़ी गई, धमकियां दी गईं, जबकि पुलिस तमाशबीन बनी रही।
Coal Mafia Attacks Female DFO: मप्र पुलिस का बेहद शर्मनाक और घिनौना चेहरा शहडोल में सामने आया है। पुलिस की मिलीभगत से माफिया यहां न सिर्फ अवैध कोयला निकाल रहे हैं, बल्कि बेखौफ परिवहन भी कर रहे हैं। दक्षिण वन मंडल की डीएफओ और टीम ने कोयले की काली मंडी सोन नदी के घोरसू नाला की खेतौली बीट में माफिया के सिंडिकेट को तोड़ने की कोशिश की। इससे खफा माफिया ने अमले पर जानलेवा हमला कर दिया। डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे ने बताया, बड़खेरा गांव के पास माफिया ने टीम को घेर लिया।
रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा को गाड़ी के नीचे घसीटा। वर्दी फाड़ी और गाली-गलौज की। डीएफओ को भी अभद्र भाषा में धमकाया। कहा, दोबारा दिखे तो गोली मार देंगे। माफिया दबंगई करते रहे और सोहागपुर पुलिस मौके पर देखती रही। हद यह है कि बुधवार रात 10 बजे घायल वन अमला थाने पहुंचा, गुरुवार सुबह 4 बजे बताया कि केस दर्ज हो गया। लेकिन 22 घंटे बाद (गुरुवार शाम 7 बजे) भी केस दर्ज नहीं किया। (MP News)
डीएफओ श्रद्धा फन्द्रे ने बताया, सोहागपुर पुलिस की जानकारी में रातभर ट्रैक्टरों से अवैध कोयला निकाला जाता है। वन विभाग ने सिंडिकेट को तोड़ने का प्रयास किया तो माफिया ने अफसरों पर हमला किया।
9 फरवरी की रात ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 के तहत टीम ने अवैध कोयला ले जा रहे ट्रैक्टर पकड़े। तभी चिंटू नामक आरोपी 40 हथियारबंद गुर्गों के साथ आया। सरेआम वन अमले को धमकाकर ट्रैक्टर छुड़ा ले गया।
11 फरवरी की रात फिर से ट्रैक्टर पकड़े गए। इस बार ग्रामीणों (वन समिति) को माफिया ने बेरहमी से पीटा और दोबारा गाड़ी छुड़ा ले गए। (MP News)
क्या राज्य में क्लास-1 महिला अफसर भी सुरक्षित नहीं हैं? ऐसे में आम लोगों का क्या होगा?
सोहागपुर पुलिस- कोयला माफिया की सांठगांठ नहीं तो पुलिस को रेंजर की फटी वर्दी क्यों नहीं दिखी?
22 घंटे तक एफआइआर क्यों दर्ज नहीं किया?
वन विभाग के अफसरों पर कोयला कारोबारियों ने हमला किया है। एसपी को जांच कर एफआइआर के लिए निर्देशित करती हूं।- एन चैत्रा, आइजी शहडोल
वन समिति के सदस्यों से कोयला खनन की सूचना पर कार्रवाई के लिए रात 8-9 बजे टीम के साथ मैं गई थी। बडखेरा के पास कोयला कारोबारियों के साथ 30-40 लोग आए और रेंजर से अभद्रता कर वर्दी फाड़ दी।- श्रद्धा पन्द्रे, डीएफओ. दक्षिण वन मंडल