भाजपा और कांगे्रस को सबसे ज्यादा वोट मिलने वाले क्षेत्रों के हालात
शहडोल. पांच साल पहले विधानसभा चुनाव 2013 में दोनों बड़ी पार्टियां भाजपा और कांग्रेस को गोहपारू के बाद शहर से सटे कल्याणपुर में सर्वाधित वोट मिले थे। मतदाताओं ने जिन मुद्दों और समस्याओं के निराकरण की आस में मतदान किया था, वे समस्याएं आज भी जस की तस हैं। पांच साल बीतने को हैं लेकिन गोहपारू, जयसिंहनगर और कल्याणपुर क्षेत्र विकास के मामले में आज भी वहीं पांच साल पहले जैसा है। पत्रिका टीम ने भाजपा और कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट मिलने वाले चार बूथों की पड़ताल की। जिसमें भाजपा का एक और कांग्रेस के दो सर्वाधित वोट वाले बूथ जयसिंहनगर गोहपारू क्षेत्र के हैं। इसके अलावा भाजपा को सबसे ज्यादा वोट देने के मामले में शहर से सटी बस्ती कल्याणपुर भी शामिल है। दोनों क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण के आधार पर दावेदारी होती है लेकिन अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इस बार प्रत्याशी चेहरे पर नहीं बल्कि काम के आधार पर वोट करने से चुनावी समीकरण बिगड़ सकता है। गोहपारू, जयसिंहनगर और कल्याणपुर के बूथ क्षेत्रों में अभी भी लोगों में आक्रोश है। जिसका असर विधानसभा चुनाव में दिखेगा।
हर दिन एक हजार लोगों को आवागमन, दलदल सड़क, पेयजल समस्या
श हर से सटा कल्याणपुर गांव। घनी बस्ती और शिक्षित वर्ग। कल्याणपुर बूथ में भाजपा को सर्वाधित वोट मिले थे। पांच साल पहले यहां पेयजल और सड़क बड़ी समस्या थी। वोटर्स ने जिन उम्मीदों के साथ भाजपा को वोट दिया था, पांच साल बाद भी वहीं उम्मीदे हैं। समस्याएं जस की तस है। शहर से सटे होने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। संस्कृत महाविद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय के अलावा आधा दर्जन बड़े स्कूल और कई दफ्तर हैं। एसबीआई बैंक भी है। यह गांव आसपास के आधा सैकड़ा गांवों को जोड़ता है लेकिन फाटक के नजदीक सड़क ही नहीं बन सकती है। हर दिन 1 हजार से ज्यादा लोगों को बदहाल सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। सामान्य दिनों में उबाड़ खाबड़ सड़क और बारिश के दिनों में दलदल में तब्दील हो जाती हैं। हर दिन एक हजार से ज्यादा लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उधर पेयजल भी बड़ी समस्या है। इसी तरह भाजपा को गोहपारू के चुहिरी के बूथ 231 में सबसे ज्यादा वोट 593 मिले थे। यहां भी समस्याएं जस की तस है। बड़े उद्योग न होने की वजह से ग्रामीण रोजगार के लिए पलायन करते हैं।
कांग्रेस की झोली में आए थे एकतरफा वोट, लेकिन समस्याएं जस की तस
जयसिंहनगर से सटे कुबरा गांव में कांग्रेस की झोली में सबसे ज्यादा वोट आए थे। यहां कांग्रेस प्रत्याशी को बूथ क्रमांक 29 में 604 वोट दिए थे। इसके बाद भी दोनों पार्टियां मतदातों के वोट को नहीं भंजा पाई। भाजपा ने फोकस किया लेकिन समस्याएं जस की तस है।
ग्रामीण और युवाओं को रोजगार से जोडऩे में दोनों पार्टियां नाकाम साबित हुई। अधिकांश युवा रोजी रोटी के लिए पलायन कर जाते हैं और साल के अंत में अन्य प्रांतों में मजदूरी करके वापस आते हैं। स्कूल तो हैं लेकिन शिक्षकों की भारी कमी है। स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई हुई है। विजिटिंग डॉक्टरों के भरोसे अस्पताल है।
कोई स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई। मरीजों को इलाज के लिए शहडोल और जयसिंहनगर आना पड़ता है। कुपोषण और एनीमिया का दंश है। बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं और महिलाएं गर्भकाल में एनिमिया से ग्रसित हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कांग्रेस को वोट देकर प्रयास किया था लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब यहां के ग्रामीण मूड बदलने के प्लान में हैं।