शहडोल

सांसद बनने के बाद टूट गया रिश्ता! पति नरेंद्र मरावी से कैसे दूर होती गईं हिमाद्री सिंह?

Himadri Singh Divorce-कांग्रेस से राजनीति में हुई शुरुआत, भाजपा नेता से हुई शादी और 2019 में बन गई सांसद...। पति के हस्तक्षेप के बाद बढ़ने लगी थी दूरियां...।
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Updated: 17 Sep 2026, 9:45 AM IST
Himadri Singh divorce
Himadri Singh divorce- भाजपा की शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी अब रहेंगे अलग। (फोटो-हिमाद्री सिंह फेसबुक)

Himadri Singh Divorce- शहडोल से भाजपा की सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी के बीच हुआ तलाक सिर्फ एक वैवाहिक रिश्ते के टूटने की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोनों के अलग-अलग राजनीतिक सफर और बढ़ती महत्वाकांक्षाओं की कहानी भी है। दोनों के बीच मतभेद हिमाद्री के सांसद बनने के बाद से शुरू हो गए थे, इसकी भी चर्चा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह बात सामने आती रही कि हिमाद्री के राजनीतिक कामकाज में हस्तक्षेप को लेकर दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं थीं।

कांग्रेस से शुरू किया था राजनीतिक सफर

वर्तमान में भाजपा की सांसद हिमाद्री सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पिता और पूर्व सांसद दलवीर सिंह की राजनीतिक विरासत के साथ शुरू किया था, वे कांग्रेस में बड़े नेता थे। वर्ष 2016 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के तत्कालीन मंत्री ज्ञान सिंह से करीब 50 हजार वोटों से चुनाव हार गईं थी। इसके एक साल बाद वर्ष 2017 में उनका विवाह भाजपा नेता नरेंद्र मरावी से हो गया था। विवाह के बाद हिमाद्री भी भाजपा में शामिल हो गईं। वर्ष 2019 में भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार लोकसभा चुनाव जीतती रहीं।

रिश्ते के साथ बदलने लगा जीवन

शुरुआती दौर में दोनों का वैवाहिक और राजनीतिक जीवन ठीक-ठाक रहा, लेकिन धीरे-धीरे हिमाद्री के राजनीतिक कामकाज में पति नरेंद्र मरावी ज्यादा ही हस्तक्षेप करने लगे थे। उनके करीबी लोगों का यह भी मानना है कि हिमाद्री अपने राजनीतिक फैसलों और संसदीय गतिविधियों में स्वतंत्रता चाहती थीं। वहीं नरेंद्र मरावी की अपनी राजनीतिक पहचान और क्षेत्र में सक्रियता थी। लेकिन, राजनीतिक करियर में पत्नी आगे निकलती चली गई और दोनों के रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा।

जीत के बाद ऐसे बदले समीकरण

हिमाद्री की राजनीतिक ताकत में कई समीकरण एक साथ जुड़ने लगे थे। कांग्रेस की पृष्ठभूमि से मिली पहचान, राजपरिवार की विरासत, भाजपा और संघ से जुड़े मतदाताओं का समर्थन और नरेंद्र मरावी की क्षेत्र में आम आदमी की छवि- इन सभी ने उन्हें मजबूत राजनीतिक उम्मीदवार बना दिया था। 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद हिमाद्री सिंह की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत होती चली गई। इसके साथ ही नरेंद्र की राजनीतिक भूमिका धीरे-धीरे सीमित होने लगी। दोनों के करियर में बदलता यही समीकरण आपसी दूरी का कारण माना जा रहा है।

तो अलग-अलग रहने लगे

समय के साथ दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ने लगा तो दोनों अलग-अलग रहने लगे थे। नरेंद्र मरावी अपने पैतृक गांव अनूपपुर चले गए, जबकि हिमाद्री सिंह पुष्पराजगढ़ स्थित अपने पैतृक निवास से संसदीय क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने लगीं।

Himadri Singh Narendra Maravi Divorce- भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और भाजपा नेता नरेंद्र मरावी में तलाक। (फोटो हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी फेसबुक पेज)

तब कानूनी की एंट्री हुई

दोनों के बीच लंबे समय से चल रही दूरी अंततः तलाक तक पहुंच गई। कानूनी प्रक्रिया के बाद अब दोनों वैवाहिक रिश्ते से अलग हो चुके हैं। हालांकि कानूनी वजह क्या दी गई है, यह आधिकारिक दस्तावेज आने के बाद स्पष्ट होगा। लेकिन, उनके राजनीति में सक्रिय नेता इसे लंबे समय से चल रहे मतभेद और दोनों की अलग राजनीतिक राह से जोड़कर देख रहे हैं।

ऐसे चली कानूनी प्रक्रिया

हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी की शादी 23 नवंबर 2017 को अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में हुई थी। दोनों का जीवन शुरुआत में ठीक-ठाक चलता रहा, लेकिन नरेंद्र सिंह मरावी का अपनी सांसद पत्नी के कामकाज में दखल बढ़ने लगा था। यहीं से दोनों में मतभेद और विवाद शुरू होते चले गए।

सांसद हिमाद्री सिंह ने कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में बताया था कि कुछ समय बाद पति से विवाद होने लगे थे। छोटी-छोटी बातों से शुरू हुआ विवाद बढ़ने लगे, तो अलग-अलग रहने लगे। यहां तक कि मिलना-जुलना भी बंद हो गए। 2021 से दोनों ने अलग रहने का फैसला कर लिया। दोनों की सहमति के बाद अनूपपुर जिले के राजेंद्र ग्राम जिला न्यायालय ने विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी। दोनों के विवाह विच्छेद की डिक्री 3 सितंबर 2026 को पारित हुई। इस तरह 9 साल बाद दोनों के रिश्तों में कानून ने भी मोहर लगा दी।

कोई संपत्ति विवाद नहीं हुआ

पति और पत्नी के दोबारा एक साथ होने के सभी रास्ते खत्म होने के बाद अब बेटी की चिंता मां को ज्यादा होने लगी थी। हिमाद्री सिंह ने अपनी याचिका में इसका जिक्र किया है। हिमाद्री ने अपनी बेटी गिरिशा कुमारी सिंह को अपने साथ रखने का फैसला लिया है, वहीं किसी तरह का गुजारा भत्ता भी पति नरेंद्र मरावी से नहीं मांगा। दोनों के आभूषण और संपत्ति को लेकर भी किसी तरह के विवाद की बातें बाहर नहीं आई हैं।

Updated on:
17 Sep 2026, 9:45 AM IST
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