
शहडोल। मुख्यमंत्री सरल बिजली योजना कार्यक्रम में टेंट और डोम तैयार करते वक्त अचानक करंट फैल गया। बिजली करंट की चपेट में आने से मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा शहर के बाणगंगा मैदान में मंगलवार की रात का है। पुलिस के अनुसार बुधवार को बाणगंगा मैदान में सरल बिजली योजना कार्यक्रम का आयोजन था। कार्यक्रम में टेंट और डोम तैयार करने का जिम्मा दुर्गा टेंट हाउस के संचालक बल्लू गुप्ता ने लिया था। बल्लू गुप्ता द्वारा सीहोर से डोम तैयार करने के लिए कई मजदूरों को बुलाया गया था। बबलू खान, बकलीलुद्दीन, मो हसीब, मोह मद सफीक, सोएब और सोएल खान टेंट में डोम तैयार करने का काम कर रहे थे। मोहम्मद सफीक और मोहम्मद हसीब और सोएब मंगलवार की रात को टेंट में चढ़कर काम कर रहे थे तभी अचानक लाइट फाल्ट होने से पूरे पाइपों में करंट फैल गया अन्य साथियों ने पुलिस को बताया कि मोहम्मद सफीक करंट की चपेट में आ गया और सोएब नीचे आ गिरा। तत्काल बिजली सप्लाई बंद करते हुए सफीक खान को निजी वाहन से इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
काफी समय तड़पता रहा फिर नीचे गिरा
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लोहे के पाइप में बिजली करंट फैलने के बाद सफीक काफी समय तक ऊपर ही झुलसता रहा और बाद में नीचे आ गिरा। मामले में ठेकेदार की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। ठेकेदार द्वारा कोई भी सुरक्षा के साधन उपलब्ध नहीं कराए गए थे। मामले के बाद भी अस्पताल में ठेकेदार और एक भाजपा नेता भी पहुंच गए। उधर मजदूर के साथी और परिजनों को रफा दफा करने का प्रयास करते रहे। हालांकि पुलिस ने मर्ग कायम करते हुए शव का पीएम कराते हुए अन्य साथियों को सौंप दिया
मृतक के परिजनों से मिलीं कलेक्टर
बाणगंगा मैदान में टेंट लगाने के दौरान गिर जाने से मजदूर सफीक खान की मौत के बाद कलेक्टर अस्पताल पहुंची। कलेक्टर शहडोल अनुभा श्रीवास्तव ने जिला चिकित्सालय पहुंचकर मृतक मजदूर के परिजनों को सांत्वना दी तथा उन्हें हर संभव आर्थिक सहायता मुहैया कराने का आश्वासन दिया। कलेक्टर द्वारा मृतक मजदूर के परिजनों को लगभग 70 हजार रुपए की तात्कालिक आर्थिक सहायता की और मृतक के शव को सीहोर भिजवाने की व्यवस्था की।
मजदूर की मौत भूले अफसर, ठेकेदारों को अभयदान
ठेकेदार और निर्माण कंपनियां लगातार नियमों को दरकिनार कर मजदूरों से काम करा रही हैं। इसके बाद भी मजदूरों के सुरक्षा और देखरेख के लिए बनाए गए विभागों के अफसर अपनी कुभकर्णी नींद से नहीं जाग रहे हैं। संबल योजना कार्यक्रम में मजदूर की मौत के पहले भी दो मामलों में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। इसके बावजूद अधिकारियों ने सामान्य कार्रवाई और मुआवजा दिलाते हुए पल्ला झाड़ लिया है। हाल ही में मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन परिसर में कांच का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरने से मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई थी। मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा शहर के पौनांग तालाब में करंट की चपेट में आने से मजदूर की मौत हो गई थी। भाजपा से जुड़े ठेकेदार को अफसरों ने राजनीतिक दबाव के चलते अभयदान दे रखा है।