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गर्भ न ठहरे इसके लिए ये उपाय अपना रहीं युवतियां

विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष : पढि़ए नसबंदी को न कहकर कौन से उपाय अपना रहे युवा
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गर्भ न ठहरे इसके लिए ये उपाय अपना रहीं युवतियां

शहडोल. परिवार नियोजन को लेकर युवाओं का ट्रेंड बदला है। पहले सिर्फ पुरुष नसबंदी से परहेज करते थे लेकिन अब महिलाएं भी स्थायी समाधान से बच रहीं हैं। बल्कि अब ये देखने में आ रहा है कि महिला और पुरुष दोनों अस्थायी समाधान पर अधिक जोर दे रहे हैं। इसमें टैबलेट, इंजेक्शन और कॉपर टी जैसे संसाधन शामिल हैं।
हालांकि पिछड़े इलाकों में अभी भी परिवार नियोजन की जिम्मेदारी पूरी तरह से महिलाओं पर है। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत पुरुष ही परिवार नियोजन में नसबंदी को अपनाते हैं, जबकि 80 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी अपनाती हैं। अधिकारियों की मानें तो आदिवासी अंचल में पुरुष नसंबंदी को लेकर अभी भी भ्रांतियां हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी रिजल्ट अच्छा नहीं आ रहा।
7000 का लक्ष्य, दो माह में 120 नसबंदी
परिवार नियोजन नसबंदी में स्वास्थ्य विभाग को इस साल 7000 का लक्ष्य मिला है लेकिन अभी सिर्फ 120 लोगों ने परिवार नियोजन अपनाया है। लक्ष्य में 6300 महिलाएं और 700 पुरुषों को शामिल किया गया है। अधिकारिेयों की मानें तो इस साल लक्ष्य का 70 फीसदी पहुंच जाएगा, जबकि पिछले साल लक्ष्य का 63 फीसदी ही हासिल हुआ था।

40 प्रतिशत यूथ ले रहे टेबलेट और इंजेक्शन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार परिवार नियोजन के नसबंदी कार्यक्रम में यूथ की ज्यादा भूमिका नहीं रहती है। डॉक्टर्स की मानें तो 40 प्रतिशत यूथ टेबलेट और इंजेक्शन का उपयोग कर रहा है। इसमें नवविवाहित परिवार ज्यादा शामिल हैं। 40 प्रतिशत टेबलेट और इंजेक्शन के अलावा 10 प्रतिशत कॉपर टी का उपयोग कर रही हैं। इसी तरह 50 फीसदी यूथ अस्थायी साधन का उपयोग परिवार नियोजन में कर रहा है। नसबंदी में यूथ सबसे पीछे है। सिर्फ दो से पांच फीसदी युवा ही नसबंदी अपना रहे हैं। इसके पीछे नसबंदी का स्थायी होना मुख्य वजह मानी जा रही है।

सकल प्रजनन दर में शहडोल आगे
रिकार्ड पर नजर डालें तो सकल प्रजनन दर टीएफडी (टोटल फॢटलिटी डेट) में शहडोल प्रदेश में अव्वल है। शहडोल जिले का टीएफडी अभी 2.7 है। जिसे अफसर अब 2.1 में लाने का प्रयास कर रहे हैं। हर परिवार में दो बच्चे होने पर यह आंकड़ा 2.1 पर पहुंच जाएगा।