डॉग स्क्वायड प्रभारी का ये भी कहना है कि रेलवे के पास ऐसी किसी बड़ी घटना से तुरंत निबटने का कोई इंतजाम नहीं है।
शाहजहांपुर। सुरक्षित सफर का दावा करने वाला रेलवे अपने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कितना संजीदा है इसकी पोल तब खुल गई जब ट्रेन में बम मिलने की सूचना मिली। ट्रेन में बम की सूचना मिलने के बावजूद जांच अधिकारी की बगैर अनुमति के ट्रेन को आगे रवाना कर दिया गया। जांच अधिकारी की मानें तो रेलवे के अधिकारियों का ये रवैया बेहद ही लापरवाही भरा रहा। अगर कोई हादसा होता तो सैकड़ों रेल यात्री बेमौत मारे जाते।
रेलवे अधिकारियों ने नहीं होने दी तलाशी
दरअसल 20 फरवरी को हावड़ा से अमृतसर जा रही 13005 अप हावड़ा अमृतसर पंजाब मेल में बम की सूचना थी। ट्रेन को सूचना के आधार पर जांच पड़ताल हेतु शाहजहांपुर जंक्शन पर रोका गया और फौरन ही मौके पर रेलवे के अधिकारियों साथ साथ, आरपीएफ, जीआरपी, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी डॉग स्क्वायड टीम को लेकर पहुंचे। ट्रेन दो घंटे से ज्यादा वक्त के लिए खड़ी रही। इस दौरान रेलवे के अधिकारियों का यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जो गैर जिम्मेदारना रवैया देखने को मिला।
बगैर अनुमति के ट्रेन रवाना की
दरअसल रेलवे के अधिकारी सिर्फ अपनी कागजीखाना पूर्ति पर ध्यान दे रहे थे। ट्रेन की जांच के जिम्मेदार डॉग स्क्वायड प्रभारी नीति प्रकाश लूसी (श्वान) के प्रभारी के अनुसार शाहजहांपुर के रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी दबाव बना रहे थे कि वो क्लीन चिट दें और ट्रेन को आगे रवाना किया जाए। वहीं डॉग स्क्वायड प्रभारी लगातार ट्रेन की बगैर जांच पड़ताल के आगे चलवाने के खिलाफ थे। डॉग स्क्वायड प्रभारी का ये भी कहना है कि रेलवे के पास ऐसी किसी बड़ी घटना से तुरंत निबटने का कोई इंतजाम नहीं है। मेरी बगैर किसी अनुमति, बगैर जांच पड़ताल के रेलवे के अधिकारियों ने ट्रेन को आगे भेज दिया। अगर ट्रेन में बम से कोई अनहोनी होती तो बड़ी संख्या में लोग बेमौत मारे जाते।
इससे पहले भी लापरवाही हो चुकी है उजागर
डॉग स्क्वायड प्रभारी नीति प्रकाश ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रेलवे के अधिकारी उन्हें चारों ओर से घेरकर लगातार उन पर क्लीन चिट के लिए दबाव बना रहे थे लेकिन वो बराबर पूरी ट्रेन को चेक करने की बात कह रहे थे। आपको बता दें कि रेलवे की लापरवाही का ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी 9 जनवरी को रेलवे की लापरवाही का खामियाजा एक महिला यात्री को भुगतना पड़ा। जिसमें शौचालय में भारी गंदगी होने के चलते महिला का पैर फिसल गया और ट्रेन के कोच के शौचालय में महिला का पैर चला गया। रेलवे के पास कोई ख़ास इंतजाम न होने के चलते महिला को करीब डेढ़ घंटे तक रेलवे की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा।