Shajapur Tragic Accident : आगरा - मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर मक्सी के पास स्थित होटल के बाहर खड़ी एक यात्री बस में शुक्रवार - शनिवार की दरमियानी रात अचानक आग लग गई। हादसे में एक मासूम बच्चे की जलकर मौत हो गई है।
Shajapur Tragic Accident : मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले से गुजरने वाले आगरा - मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर मक्सी के पास स्थित होटल के बाहर खड़ी एक यात्री बस में शुक्रवार - शनिवार की दरमियानी रात अचानक आग लग गई। हादसे के समय लगभग सभी यात्री होटल में चाय - नाश्ता करने उतरे हुए थे और कुछ बस में भी सवार थे। आग लगते ही बस मेंसवार अन्य यात्री भी आनन फानन में नीचे उतर गए, लेकिन 4 वर्षीय बच्चा बस में फंसा रह गया। आग पर काबू पाने के बाद बच्चे को ढूंढा तो बस के अंदर उसका कंकाल मिला। बच्चे का जला हुआ कंकाल मिलने से मौके पर मौजूद बस यात्रियों समेत लोगों में सनसनी फैल गई। फिलहाल, पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है।
बताया जा रहा है कि, बस में आग इतनी तेजी से फैली कि, कुछ ही मिनटों में पूरी बस आग की चपेट में आ गई और देखते ही देखते पूरी बस जलकर खाक हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही शाजापुर, मक्सी और तराना से फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। वहीं, सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और मामले की पड़ताल शुरू की। प्रारंभिक तौर पर आग लगने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। हादसे के चलते घटना स्थल पर लोगों की भारी भीड़ लग गई।
बताया जा रहा है कि, हादसे के पीछे लापरवाही और नियम कायदों की अनदेखी भी बड़ा कारण मानी जा रही है। पहली चीज तो ये कि, संबंधित बस में आपातकालीन द्वार तक नहीं था। इसके अलावा बस में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का सामान भरा हुआ था, जिसने इतनी तेजी से आग पकड़ी कि, आग की चपेट में आए मासूम बच्चे को बचाने का किसी को भी मौका तक नहीं मिला। आखिरकार उसके घर वालों का बच्चे का शव तक नही मिल सका। आग पर काबू पाए जाने के बाद बस के अंदर से बच्चे का सिर्फ कंकाल बरामद हुआ, जिसे पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पहुंचा दिया है। फिलहाल, आज पोस्टमार्टम के बाद उसे परिजन के सुपुर्द किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि, जब भी ऐसे हादसे हुए हैं, तब नियमों की अनदेखी सामने आई है। हादसा होने के बाद जिम्मेदार जागते हैं और कुछ दिन कार्रवाई की जाती है। इसके बाद फिर नियमों की अनदेखी शुरू हो जाती है और जिम्मेदार भी लापरवाह हो जाते हैं। ऐसे में बस संचालकों में किसी तरह की कार्रवाई का डर तक नहीं रहता और वे बेखौफ होकर फिर नियमों को धता बताने में जुट जाते हैं।