शामली

UP के इस शहर से हुई थी तबलीगी जमात की शुरुआत, इस तरह दुनियाभर में हुआ विस्तार

Highlights - मौलाना इलियास कांधलावी ने साल 1906 में कांधला से की थी शुरुआत - कांधला में है मौलाना साद कांधलवी का पुश्तैनी घर - मौलाना साद भी 1982 से 1990 तक कांंधला में ही रहे थे
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Apr 02, 2020
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शामली. देशभर में कोरोना वायरस के लॉकडाउन के बीच तबलीगी जमात भी सुर्खियों में है। दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज में मिले कोरोना पीड़ितों ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। देश में तबलीगी जमात के चलते एकाएक कोरोना पीड़ितों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। वहीं, तबलीगी जमात के अमीर (अध्यक्ष) मौलाना साद पुलिस के लिए पहेेली बन गए हैं। तबलीगी जमात में शामिल होने देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशी नागरिक भी पहुंचे थे। अब सभी राज्यों की पुलिस जमात में शामिल होने पहुंचे लोगों की तलाश में जुटी है। शामली से भी करीब 57 लोग जमात में पहुंचे थे, जिन्हें अब क्वॉरेंटाइन वार्ड मेें शिफ्ट कर दिया गया है। बता दें कि तबलीगी जमात के इस मरकज का अमीर मौलाना साद कांधलवी शामली के कस्बे कांधला का ही रहने वाला है।

दरअसल, तबलीगी जमात की शुरुआत उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला कस्बे से हुई थी। स्थानीय लोग कहते हैं कि यहां मौलाना साद कांधलवी का पुश्तैनी घर भी है। उन्होंने बताया कि तबलीगी जमात की शुरुआत इलियास कांधलवी ने वर्ष 1906 में कांधला से की थी। शुरुआती दौर में वह कांधला में रहकर ही धर्म का प्रचार करते थे। इसके बाद इलियास कांधलवी 1926-27 में हजरत निजामुद्दीन गए, जहां उन्होंने मरकज वाली मस्जिद बनवाई। इसके बाद उन्होंने मरकज में मुस्लिम लोगों को एकत्र कर धर्म का प्रचार-प्रसार बढ़ाया। वह मरकज के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में भी मुस्लिम धर्म का प्रचार करने थे। धीरे-धीरे उनके साथ बड़ी जमाज जुड़ गई। भारत के साथ ही उन्होंने विदेशों में भी तबलीगी जमात को बढ़ाया।

मौलाना इलियास कांधलावी के इंतकाल के बाद तबलीगी जमात की जिम्मेदारी उनके बेटे के कंधों पर आ गई। उनके निधन के बाद बेटे मौलाना यूसुफ को इस जमात का अध्यक्ष बनाया गया। मौलाना यूसुफ के अचानक देहान्त के बाद मौलाना इनामुल हसन अध्यक्ष बने। मौलाना इमानुल हसन 1965 से 1995 तक तबलीगी जमात के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने दुनियाभर में जमात की जड़ें मजबूत की। 1995 में मौलाना इमानुल के निधन के बाद जमात में विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद किसी को भी अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो कुछ लोगों की कमेटी ही जमात को चलाने लगी। जब कमेटी के ज्यादातर सदस्यों की मौत हो गई तो मौलाना साद कांधलवी ने खुद को जमात का अध्यक्ष घोषित कर दिया। मौलाना साद मोहम्मद इलियास कांधलवी के पड़पोते हैं।

मौलाना साद के समधि मौलाना बदरुल हसन कहते हैं कि कांधला से ही तबलीगी जमात की शुरुआत हुई थी। मौलाना साद 1982 से 1990 तक यही रहे थे। मौलाना ने साद पर लगे आरोपों पर मौलाना बदरुल हसन का कहना है कि इसमें सारी गलती प्रशासन और पुलिस की है। मौलाना बदरुल का कहना है कि तबलीगी जमात लोगों को गलत काम करने से रोकती है।

Published on:
02 Apr 2020 12:16 pm
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