मध्य प्रदेश के कूनो में बसे चीतों को अब राजस्थान की आबोहवा पसंद आ रही है, वहीं चीता एक्सपर्ट टीम ने भी राजस्थान के एन्वाटरमेंट को चीतों के अनुकूल माना है, ऐसे में अब बड़ी खबर आ रही है मानसून के बाद जल्द ही अफ्रीका से चीतों की आमद होगी
कूनों के बाद गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को बसाने की तैयारी है। मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में चीतों के लिए बाड़ा बनकर तैयार हो गया है। वहां पर सभी अनुकूल व्यवस्थाएं हैं। जल्द ही यहां अफ्रीका से चीते आएंगे। इस पर अफ्रीका की टीम ने अपनी मुहर भी लगा दी। ऐसे में अब सर्दी में ही चीतों की आमद गांधीसागर अभयारण्य में होगी। वन विभाग की ओर से यहां चीतों के खाने की व्यवस्था के लिए मशक्कत की जा रही है। अधिकारियों के समक्ष वर्तमान में सबसे अधिक समस्या चीतों के लिए खाने की है।
रावलीकुडी में 28 किमी लंबा बाड़ा बनकर तैयार हो गया है। यह 64 वर्ग किमी में फैला हुआ है। चीतों के लिए प्रति वर्ग किलोमीटर 20 शाकाहारी वन्य प्राणी की आवश्यकता होती है। लेकिन वर्तमान में प्रति वर्ग किलोमीटर 15 ही शाकाहारी वन्य प्राणी हैं। 1250 वन्य प्राणी अभी तीन सेंचुरी से आना शेष हैं। उससे पहले बारिश में ही मानक के अनुसार प्रति वर्ग किलोमीटर 20 शाकाहारी वन्य प्राणियों की संख्या हो जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि चीतों के लिए 8 क्वॉरंटीन बाड़े बनाए गए है, जिनमें चीतों को रखा जाएगा। सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। एक मेडिकल यूनिट भी बनाई है, जिसमें चीतों का उपचार हो सके। हाल ही कुछ दिनों पहले अफ्रीका की टीम ने भी हरी झंडी दे दी है। बारिश के बाद ठंड के मौसम में चीते गांधीसागर लाए जाएंगे।
श्योपुर स्थित कूनो में 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 8 चीते लाए गए। इनमें से 7 वयस्क चीतों की मौत हो चुकी है। फिलहाल 13 वयस्क चीते कूनो में हैं। राजस्थान से सटे गांधी सागर में पहले चरण में दक्षिण अफ्रीका से 5- 8 चीते लाए जाएंगे। मौका देखने आए दल ने राजस्थान की आबोहवा को चीतों के लिए अनुकूल माना है।
बारिश के बाद सर्दी में चीतों को अफ्रीका से यहां लाया जाएगा। वर्तमान में प्रति वर्ग किमी 15 शाकाहारी वन्य प्राणी है। प्रति वर्ग किमी 20 वन्य प्राणियों की जरूरत है। बारिश के बाद और लाए जाएंगे।
- राजेश मंडवालिया, एसडीओ, गांधीसागर वनविभाग