पिता के निधन के बाद मां ने जैसे-तैसे संभाला...। छोटे से गांव की बेटी सोनल चौधरी बन गई एयर होस्टेस...>
सिर्फ 11 साल की उम्र में एक हादसे में असमय पिता का साया सिर से उठ गया था। मां ने बेटी को जैसे-तैसे संभाला। बेटी ने होश संभाला और पिता को खोने के बावजूद अपना हौसला टूटने नहीं दिया। अब यह बेटी हवाई जहाज में एयर होस्टेस बनकर अपने सपनों को उड़ान दे रही है।
श्योपुर जिले के छोटे से गांव बमोरीहाला की बेटी सोनल चौधरी ने प्रतिकूल परिस्थितियों में मेहनत कर एयरलाइंस में केबिन-क्रू बनने का सपना पूरा कर दिया। संघर्ष के दौर से गुजरकर महिला आत्मनिर्भरता की यह कहानी सभी को प्रेरणा देती रहेगी। श्योपुर जिले के छोटे से गांव बमोरीहाला की बेटी सोनल चौधरी ने विपरीत परिस्थितियों में मेहनत कर एयरलाइंस में केबिन-क्रू बनने का सपना पूरा कर लिया। शुक्रवार, 8 सितंबर 2023 को ही सोनल ने दिल्ली से श्रीनगर तक उड़ान में अपनी पहली ड्यूटी भी पूरी की।
पहले मां ने, फिर नाना-नानी ने दिखाई राह
एयरहोस्टेस बनी सोनल चौधरी श्योपुर जिले के ग्राम बमोरीहाला निवासी एक किसान मंगल सिंह जाट की पुत्री हैं। किसान मंगल सिंह का वर्ष 2011 में अपने खेत में ही करंट लगने से असामयिक निधन हो गया, तब सोनल 11 वर्ष की थी, जबकि सोनल का छोटा भाई 8 साल का। इसके बाद सोनल की मां मीनू चौधरी ने दोनों बच्चों को संभाला और गांव में ही प्राथमिक शिक्षा पूरी कराई। इसके बाद सोनल आगे की पढ़ाई के लिए अपने ननिहाल ग्वालियर चली गई, जहां नाना-नानी ने आगे की राह दिखाई। इसके बाद सोनल ने ग्वालियर से ही स्नातक किया और अन्य कोर्स किए।
बचपन से था हवाई जहाज में उड़ने का सपना
एयर होस्टेस सोनल का सपना बचपन से ही हवाईजहाज में बैठने का सपना रहा। जब गांव के ऊपर आसमान से हवाइजहाज गुजरते तो सोनल अपने माता-पिता से कहती कि मैं भी एक दिन इस चीलगाड़ी (गांव में हवाईजहाज को कहते हैं) बैठूंगी। यही वजह है कि ग्वालियर में ग्रेज्युएशन के बाद वर्ष 2019 में सोनल इंदौर चली गई, जहां एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टाफ का काम किया और अपने सपने को पूरा करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया। सोनल ने अपना कॅरियर इसी दिशा में बनाने के लिए मेहनत की, जिसका नतीजा ये रहा कि इंडिगो एयरलाइंस में उसका केबिन क्रू के रूप में चयन हो गया। जिसके बाद गत 6 सितंबर को उसने ज्वाइन किया और शुक्रवार को दिल्ली से श्रीनगर तक पहली उड़ान भी पूरी की।