श्योपुर

MP में महिला ने एक साथ ‘4 बच्चों’ को दिया जन्म, 2 बेटे-2 बेटियों की गूंजी किलकारी

mp news: प्रसव सामान्य तरीके से हुआ है, लेकिन प्री-मैच्योर प्रसव होने के चलते बच्चों का वजन कम है। बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है।

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May 04, 2026
woman gave birth to four babies two sons and two daughters (Patrika.com)

mp news: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में एक परिवार को चौगुनी खुशी मिली है। जिला अस्पताल में रविवार रात एक महिला ने एक साथ 4 बच्चों को जन्म दिया है। जिसमें 2 बेटे और 2 बेटी शामिल हैं। हालांकि प्रसव सामान्य तरीके से हुआ है, लेकिन सातवें महीने में ही प्री-मैच्योर प्रसव होने के चलते बच्चों का वजन कम है, जिसके कारण बच्चों को एसएनसीयू (स्पेशन न्यूबोर्न केयर यूनिट) में भर्ती कराया गया है। बच्चों को 24 घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि श्योपुर जिला अस्पताल में ही इससे पहले 29 फरवरी 2020 को भी बड़ौदा निवासी एक महिला ने एक साथ 6 बच्चों को जन्म दिया था।

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22 साल की युवती ने दिया जन्म, वजन कम

बताया गया है कि वीरपुर तहसील के ग्राम भेरूपुरा निवासी पूजा सुमन (22) पत्नी हुकुम सुमन गर्भवती होने के चलते रविवार की शाम को प्रसव पीड़ा हुआ। जिसके बाद परिजन महिला को लेकर श्योपुर आए और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान रविवार-सोमवार की रात लगभग 3 बजे के आसपास महिला ने एक साथ 4 बच्चों को जन्म दिया। लेकिन महिला का प्रसव सातवें महीने में ही हो गया, लिहाजा बच्चे भी प्री-मैच्योर हुए और सभी का वजन 780 ग्राम से लेकर 980 ग्राम तक है यानि सभी बच्चे एक किलो से कम वजन के हैं। यही वजह है कि बच्चों की हालत नाजुक होने के चलते सभी को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया।

2020 में एक साथ जन्मे थे 6 बच्चे

बता दें कि, श्योपुर जिला अस्पताल में इससे पहले साल 2020 में ऐसी ही खुशखबरी सामने आई थी। एक महिला ने एक साथ 6 नवजातों को जन्म दिया था। हालांकि, अविकसित होने के कारण दो बच्चों की मौत हो गई थी। 4 नवजातों अभी स्वस्थ है। हैरानी वाली बात ये है कि जैसे ही अस्पताल में बाकी लोगों को इस बात की खबर लगी वैसे सभी बच्चों को देखने वार्ड के बाहर खड़े हो गए थे।

7 लाख में एक बार होता है ऐसा

डॉक्टरों के अनुसार, एक साथ चार बच्चों का होना एक दुर्लभ यानी लगभग 7 लाख में एक बार होने वाली घटना है। यह प्रसव एक हाई रिस्क मेडिकल स्थिति है, जिसे विशेषज्ञ द्वारा विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। हालांकि, इसमें सबसे बड़ी चिंता प्रीमैच्योर बर्थ होता है। ऐसा इस लिए क्योंकि महिला का गर्भाशय चार बढ़ते बच्चों को पूर्ण अवधि तक समायोजित करने के लिए डिजाइन नहीं होता। इससे बच्चों ये दिक्कतें हो सकती हैं- सांस लेने में तकलीफ, अविकसित अंग और जन्म के समय कम वजन।

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Published on:
04 May 2026 09:08 pm
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