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भारतीय चीतों को मिलेगा नया नाम और नंबर, खास होगी नामकरण टेक्निक

Cheetah in Kuno national park: कूनो प्रबंधन ने चीता स्टेयरिंग कमेटी को प्रस्ताव भेजा, नई पद्धति से चीतों का नामकरण करने की तैयारी...

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Cheetah in kuno national park

Cheetah in kuno national park(photo X)

Cheetah Kuno National Park: कूनो नेशनल पार्क में बढ़ते भारतीय चीतों के कुनबे के शावकों का भी अब नामकरण किया जाएगा। इसके लिए कूनो प्रबंधन ने चीता स्टीयरिंग कमेटी को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें एक नई पद्धति से भारतीय चीतों के नाम रखने का प्रस्ताव है। इसमें इन चीतों के नामीबियाई और दक्षिणी अफ्रीकी चीतों की तरह सामान्य नाम नहीं होंगे, बल्कि टेक्निकल नाम होंगे।

नाम के साथ नंबर भी बदले जाएंगे

हालांकि अभी कुछ बड़े चीतों के नाम केजीपी-1, केएपी-1 आदि तरह के नाम रखे हुए हैं, लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार इनके नंबर भी बदल जाएंगे। यानि नई पद्धति कूनो के अक्षर के साथ ही मादा चीता के नाम का पहला अक्षर और फिर संख्या लिखी जाएगी, लेकिन संख्या 1, 2 या 3 नहीं होगी, बल्कि 11 से शुरू होगी। ऐसे में शनिवार को 4 शावकों को जन्म देने वाली मादा चीता केजीपी-2 आगामी समय में केजीपी-12 हो जाएगी। कुछ इसी तरह अन्य भारतीय चीतों और शावकों के नाम रखे जाएंगे।

कूनो में अब 37 भारतीय चीते

एमपी के श्योपुर के कूनो में वर्तमान में 37 चीते मौजूद हैं। ये 7 मादाओं के हैं। इनमें केजीपी-2 ने शनिवार को 4 शावकों को जन्म दिया। इससे पहले मादा चीता ज्वाला के 9, आशा और गामिनी के 8-8, मुखी के 5, निर्वा के 3 और वीरा का 1 शावक चीता कूनो में मौजूद है।

भारत में अब कुल 57 चीते

बता दें कि नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना के साथ ही भारतीय चीतों की संख्या को मिलाकर भारत में अब चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है। बता दें कि भारत में चीतों के पुनर्वास को लेकर सितंबर 2022 में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को भारत के दिल मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में तैयार बाड़े में छोड़ा था।

प्रोजेक्ट चीता की तीन साल की उपलब्धियां

बता दें कि भारत के चीता प्रोजेक्ट पर दुनिया भर के वन्यजीव एक्सपर्ट्स की निगाहें टिकी हैं। खबरें भी आती रहीं कि चीता प्रोजेक्ट महज दिखावा साबित हो रहा है। इस साल चीता प्रोजेक्ट को शुरू हुए 4 साल हो जाएंगे। लेकिन अब तक के तीन सालों में इसकी उपलब्धियां भी कम नहीं हैं।

1- नई ज़िंदगी की शुरुआत: अब तक 20 चीते (8 नामीबिया से, 12 दक्षिण अफ्रीका से) लाए गए। कई बार जन्म भी हुआ। 2023 और 2024 में कुनो नेशनल पार्क में मादा चीतों ने शावकों को जन्म दिया। हालांकि इनमें से सभी शावक जीवित नहीं रह सके, लेकिन यह संकेत है कि भारत की धरती चीता प्रजनन के लिए सक्षम है।

2- पर्यावरण संरक्षण

चीते घास के मैदानों के प्रमुख शिकारी होते हैं। इनके आने से शिकार के आधार (चीतल, चिंकारा, नीलगाय आदि) की आबादी नियंत्रित रहती है। जिससे पारिस्थितिकीय संतुलन बना रहता है और अन्य प्रजातियों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार हो रहा है।

3- ये प्रोजेक्ट दुनियाभर के लिए संदेश

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से भारत ने दुनिया को दिखाया कि वह न सिर्फ बाघ, शेर और हाथी जैसे प्राणियों की रक्षा कर रहा है, बल्कि विलुप्त हो चुके वन्य जीवों की वापसी भी कर सकता है।

4-Project Cheetah अफ्रीका और एशिया के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण भी बना।