स्क्रब टायफस रोग एक जीवाणु रिकिटेशिया के संक्रमित पिस्सू के काटने से फैलता है, जो खेतों, झाड़ियों तथा घास पतवार में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह चमड़ी के माध्यम से शरीर में फैलता है और बुखार पैदा करता है। शरीर में अकड़न या शरीर टूटा सा होना प्रतीत लगता है।
शिमला. हिमाचल प्रदेश में स्क्रब टाइफस बीमारी ने दस्तक दे दी है और इस महीने शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में 21 मामले सामने आ चुके है, जबकि जुलाई में 11 मामले सामने आए थे। इस बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है और सभी अस्पताल के प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में हर रोज स्क्रब टायफस के मामले आ रहे हैं।
आईजीएमसी के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ राहुल राव बताया कि स्क्रब टायफस बीमारी के आईजीएमसी अस्पताल में जुलाई महीने में लोगों की पुष्टि हुई थी तथा अगस्त माह में अब तक 21 मरीज अस्पताल में आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले गत वर्षों से यह प्रतीत होता है कि स्क्रब टायफस के मरीज सितंबर महीने में सबसे ज्यादा अस्पताल में आते हैं और इस साल के आंकड़े भी इसी और इंगित करते हैं। विशेषज्ञा ने दोनों बीमारियों के रोकथाम में विशेष बल देने पर जोर दिया है और डॉ. राहुल राव ने जागरूकता के विषयों पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आई फ्लू नामक बीमारी से बचाव के लिए हाथ तथा मुंह की सफाई सफाई रखने पर विशेष बल दिया गया। स्क्रब टायफस रोग एक जीवाणु रिकिटेशिया के संक्रमित पिस्सू के काटने से फैलता है, जो खेतों, झाड़ियों तथा घास पतवार में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह चमड़ी के माध्यम से शरीर में फैलता है और बुखार पैदा करता है। शरीर में अकड़न या शरीर टूटा सा होना प्रतीत लगता है। रोकथाम के बारे में उन्होंने यह बताया कि खेतों में काम करते समय शरीर खासकर टांगे पाँव तथा बाजू ढककर रखें ।
उन्होंने कहा कि घर के आसपास घास, खरपतवार न उगने दें। उन्होने यह भी बताया कि पिस्सू के काटने से शरीर में जलने जैसा एक निशान भी बन जाता है उन्होंने सभी जनमानस से अपील करते हुए कहा कि इस बारे में सभी को जागरुक रहने का आग्रह किया और लक्षण आने पर तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श लेने को कहा स्क्रब टायफस एक गैर संक्रामक रोग है और इसकी रोकथाम साफ सफाई से संभव है और इसकी जागरूकता के लिए हम सभी को निरंतर प्रयत्नशील रहना चाहिए।