सीधी

छह साल की लंबी लड़ाई के बाद कर्मचारियों को मिला न्याय, विभाग ने निरस्त की नियम विरुद्ध पदोन्नति

मप्र के सीधी जिले में नियम विरुद्ध पदोन्नति देकर संविदा लिपिकों को बना दिया था लेखापाल, हाइकोर्ट के आदेश पर शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई
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May 25, 2018
Education department canceled Rule versus promotion in madhya pradesh
Education department canceled Rule versus promotion in madhya pradesh

सीधी. शिक्षा विभाग में संविदा पर नियुक्त किए गए चार लिपिकों को नियमविरुद्ध पदोन्नति देकर लेखापाल बनाए जाने को अवैध बताते हुए समिति ने उनकी पदोन्नति निरस्त कर दी। साथ ही नियम विरुद्ध पदोन्नति देने वाले तत्कालीन डीपीसी एचपी कुर्मी के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है।

टाल मटोल करती रही जिला समति
मामला वर्ष 2011 का है, तभी से ये चार लिपिक न सिर्फ गलत तरीके से लेखापाल के पद पर काबिज थे, बल्कि वेतन-भत्ते भी ले रहे थे। इनके अवैध पदोन्नति को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, जहां से राज्य शिक्षा केंद्र को पदोन्नति निरस्त कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जिला समति टाल मटोल करती रही। पत्रिका ने १७ अप्रैल के अंक में 'नियम विरुद्ध पदोन्नति से लेखापाल बने थे लिपिकÓ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर जिम्मेदारों का ध्यान आकृष्ट कराया। इसे गंभीरता से लेते हुए पदोन्नति निरस्त की गईं।

इन्हें मिली थी पदोन्नति
तत्कालीन डीपीसी ने चार लिपिकों शिवनारायण सिंह, राजबहोर कुशवाहा, शिवदयाल शर्मा व दयाशंकर सोनी को नियमों की अवहेलना करते हुए २८ मार्च २०११ को संविदा लेखापाल के पद पर पदस्थ किया था। इसके खिलाफ कुछ कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल ने कलेक्टर को पत्र भेजकर लेख किया गया कि राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश क्रमांक ६५९ दिनांक २२ फरवरी २००३ द्वारा जिले में रिक्त पदों की पूर्ति केवल प्रतिनियुक्ति आधार पर किया जाना है। अत: आपके द्वारा इस प्रकार निर्देशों के विपरीत संविदा निपिक श्रेणी-३ की लेखापाल के पद पर की नियुक्ति तत्काल निरस्त करें।

उच्च न्यायालय से स्थगन लेकर जमे रहे
राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के उक्त पत्र के अनुपालन में तत्कालीन कलेक्टर ने आदेश बिना प्रक्रिया, योग्यता व निर्देश के प्रतिकूल की गई नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश दिया था, लेकिन चारों संविदा लेखापाल उच्च न्यायालय से स्थगन लेकर पद पर कार्यरत रहे। उधर उच्च न्यायालय ने ९ नवंबर २०१७ को आदेश पारित किया कि बिना किसी नियम आधार के की गई नियुक्ति पर सुनवाई का अवसर देते हुए अवैध नियुक्तियां निरस्त की जांए।

स्वत: समाप्त हो जाने थे पद
इस पर राज्य शिक्षा केंद्र ने फिर १९ जनवरी २०१८ को कलेक्टर व पदेन जिला मिशन संचालक सर्व शिक्षा अभियान मिशन सीधी को पत्र लिखा कि राजबहोरन कुशवाहा, शिवदयाल शर्मा, शिवनारायण सिंह एवं दयाशंकर सोनी को दी गई पदोन्नति नियम विरुद्ध है, क्योंकि सर्वशिक्षा अभियान मिशन के पद परियोजना के पद हैं, परियोजना समाप्ति उपरांत यह पद स्वत: समाप्त हो जाएंगे, इस परियोजना में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को पदोन्नत किए जाने का नियम नहीं है। २९ दिसंबर २०१७ को राज्य स्तरीय समिति ने निर्देशित किया था कि संविदा लिपिक से पदोन्नत कर संविदा लेखापाल बनाया जाना गलत है। अत: उक्त कर्मचारियों को सुनवाई का अवसर देकर एक माह के भीतर नियमानुसार आदेश जारी किया जाए।

लिपिक पद पर भी नियुक्ति स्पष्ट नहीं
जिला समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि २१ वर्ष से संविदा लिपिक व लेखापाल के पद पर पदस्थ लिपिकों के नियुक्त आदेश आद्यावधि तक प्राप्त नहीं है। लिहाजा, संबंधितों की उक्त दीर्घ अवधि तक संविदा लिपिक के पद पर कार्य को दृष्टिगत रखते हुए इनकी संविदा लिपिक पद पर सेवाओं को आगे बनाए रखने या समाप्त करने के संबंध में निर्णय करने हेतु संचालक राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल को प्रस्ताव भेजा जाए, क्योंकि लिपिक के पद स्वीकृति की स्थिति पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

Published on:
25 May 2018 02:14 am