हर साल औसतन पचास हजार प्रसव होते हैं। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें लगी हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट का अभाव या कहीं मशीनें खराब मिलने के कारण गर्भवती महिलाओं को निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
यह प्रसूूताओं के लिए अच्छी खबर है। अब गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी के लिए चक्कर काटने से निजात मिलेगी। गर्भवती महिला मां वाउचर योजना में पंजीयन के बाद ई वाउचर के जरिए सोनोग्राफी के अधिकृत जांच केंद्र पर निशुल्क सोनोग्राफी करवा सकेगी। यह जानकारी मिशन निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने वीसी में दी।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया होने से पीसीटीएस पर पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को लेटेस्ट मंथली पीरियड तारीख के अनुसार दूसरी या तीसरी तिमाही में प्रधानमंत्री मातृत्व अभियान दिवस पर सोनोग्राफी करवाने के लिए क्यूआर कोड युक्त कूपन रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जारी किया जाएगा। इसके आधार पर यह सुविधा मिलेगी। वीसी में योजना के बारे में जानकारी दी गई। वीसी में सीएमएचओ डॉ. निर्मल सिंह, आरसीएचओ डॉ. छोटेलाल गढ़वाल, सहित जिले के सभी बीसीएमओ ने भाग लिया।
जिले में हर साल औसतन पचास हजार प्रसव होते हैं। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें लगी हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट का अभाव या कहीं मशीनें खराब मिलने के कारण गर्भवती महिलाओं को निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर एक बार के अल्ट्रासाउंड करीब एक हजार रुपए खर्च होते हैं। प्रसव अवधि के दौरान चार से पांच सोनोग्राफी की जाती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि किसी कारणवश स्वास्थ्य केंद्र पर अल्ट्रा साउंड व अन्य जांच नहीं हो पा रही है तो उन्हें निजी जांच केंद्रों पर भेजा जाएगा।
वीसी में बताया गया कि विभागीय सॉफ्टवेयर पीसीटीएस इंपेक्ट और ओजस का इंटीग्रेटेड कर ऑनलाइन प्रणाली विकसित की गई है। सीएमएचओ डॉ. निर्मल सिंह ने बताया कि मां वाउचर योजना में गर्भवती महिला की दूसरी या तीसरी तिमाही में गर्भकाल के दौरान सोनोग्राफी निशुल्क कराई जाएगी। इस योजना में सोनोग्राफी सेंटरों को जोड़ा जाएगा।