प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अब स्थायी उप प्राचार्य मिल सकेंगे। राजस्थान पत्रिका में उप प्राचार्य के पदस्थापन की विसंगति को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार जागे है।
सीकर। यह प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अब स्थायी उप प्राचार्य मिल सकेंगे। राजस्थान पत्रिका में उप प्राचार्य के पदस्थापन की विसंगति को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार जागे है। अब शिक्षा विभाग की ओर से काउंसलिंग का कलैण्डर जारी किया है।
दरअसल, शिक्षा विभाग की ओर से फरवरी 2023 में यानि 16 महीने पहले विभागीय पदोन्नति से व्याख्याताओं को उप प्राचार्य के पद पदोन्नति किया गया था। अब शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष मोदी ने शाला दर्पण पोस्टिंग मैनेजमेंट सिस्टम पर ऑनलाइन काउसलिंग प्रक्रिया के लिए कार्यक्रम जारी किया है। इसके जरिए प्रदेश के 10 हजार 49 पदोन्नत हुए उप प्राचार्य को स्थायी स्कूल मिल सकेंगे। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका के 17 जून के अंक में उप प्राचार्य के जमघट को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था।
शिक्षक संगठनों की ओर से 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती की मांग भी की जा रही है। रेसटा प्रदेशाध्यक्ष मोहरसिंह सलावद ने बताया कि आरपीएससी के माध्यम से सैकंडरी स्कूलों के एचएम के पदों पर 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती व 50 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति होती थी। पूर्व सरकार ने एचएम पद समाप्त कर उसकी जगह नया पद उप प्राचार्य का सृजित कर दिया। कई संगठनों ने उप प्राचार्य का पद शत प्रतिशत पदोन्नति से भरने की मांग भी की जा रही है।
22 जून से 24 जून तक विशेष वर्ग की जानकारी जुटाना, 25 से 27 जून तक मिली सूचनाओं के आधार पर अस्थाई वरीयता सूची विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर आपत्तियां मांगी जाएगी। 28 जून को एनआईसी, शाला दर्पण टीम की ओर से अपलोड डाटा का सत्यापन, 30 जून को प्राप्त अंतिम आपत्तियों के आधार पर संशोधन, एक से चार जुलाई तक वरीयता सूची के आधार पर स्कूलों का चयन एवं ऑप्शन लॉक होगा व पांच को चयनित विकल्पों पर रिपोर्ट तैयार व आठ जुलाई को पदस्थापन संबंधी आदेश जारी होंगे।