Singer Nandini Tyagi: सीकर की नंदिनी त्यागी अपनी मखमली आवाज से मायड़ अस्मिता को सुरों में पिरोकर दुनिया भर में राजस्थान का मान बढ़ा रही हैं। शेखावाटी की यह बेटी महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं।
Rajasthani Singer Nandini Tyagi: लक्ष्मणगढ़ (सीकर): यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो तमाम मुसीबतों को मात देकर भी अपनी माटी का मान बढ़ाया जा सकता है। कुछ ऐसी ही संघर्षभरी कहानी है सीकर निवासी नंदिनी त्यागी की।
नंदिनी आवाज के जरिए राजस्थान की माटी का मान बढ़ाने में जुटी हैं। पिछले दिनों पीएम मोदी ने जी-20 सम्मेलन में शिरकत करते हुए घूमर प्रस्तुति को सराहा था। इस गीत को भी नंदिनी ने गाया। इस सांस्कृतिक सफर में पिता मनीष त्यागी और मां मीनल त्यागी का अहम रोल रहा।
नंदिनी के पिता ने बताया कि दस वर्ष की उम्र में उस्ताद इब्राहिम खान से गायन सीखना शुरू किया। इसके बाद सीकर पुलिस के अलावा कई सरकारी विभागों के सामाजिक समस्याओं के लिए गीत लिखे जो अब तक लोगों की जुबां पर है।
त्यागी ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि जब बेटियां अपनी प्रतिभा और संस्कृति को साथ लेकर आगे बढ़ती हैं तो वे समाज और भाषा दोनों को नई पहचान दिला सकती हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए जनचेतना होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। लेकिन अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। वे कहती हैं कि यदि युवा अपनी भाषा और संस्कृति को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लेकर आएं, तो यह एक नई सांस्कृतिक क्रांति बन सकती है।
नंदिनी ने अपने इस अनूठे संगीत सफर की शुरुआत जनवरी 2025 में फिल्म गाइड के कालजयी गीत “पिया तोसे नैना लागे” को मायड़ भाषा में “थारी वाता मन न भावे जी” से की थी। यह गीत सोशल मीडिया पर करीब चार लाख व्यूज के साथ वायरल हुआ।
इसके बाद उन्होंने लगातार हिंदी गीतों के राजस्थानी संस्करण तैयार करने का सिलसिला शुरू किया और एक साल के भीतर लगभग पांच दर्जन गीतों को मायड़ स्वरूप में प्रस्तुत कर दिया।
इनमें प्रमुख रुप से पिया तोसे नैना लागे-थारी वाता मन न भावे, घर आजा परदेसी-मोर बोले पापीहो बोले, अंगारों-अजी ना जी ना, मीठी घणी लागे बोली आदि शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने स्त्री 2, बॉर्डर, विवाह सहित कई फिल्मों के गीतों को भी मायड़ भाषा में नया स्वर दिया है।
नंदिनी के गीतों का जादू सात समुन्दर पार भी गूंज रहा है। पिछले दिनों वियतनाम में आयोजित कार्यक्रम में गीतों से प्रवासी राजस्थानियों और स्थानीय श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वियतनाम के अलावा नंदिनी लंदन, इटली, दुबई, स्कॉटलैंड, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और नाइजीरिया सहित लगभग एक दर्जन देशों में राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।
नंदिनी बताती हैं कि राजस्थानी भाषा को बढ़ावा देने की प्रेरणा उन्हें राजस्थान पत्रिका की वैचारिक परंपरा से मिली। पत्रिका के संस्थापक कर्पूरचंद कुलिश और प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने मायड़ भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प लिया। उनका मानना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया मनोरंजन के साथ-साथ भाषा संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को लोक कलाकारों के लिए विशेष प्रोत्साहन और अनुदान की व्यवस्था करनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों पर राजस्थानी कलाकारों को प्रतिनिधित्व, राज्य स्तरीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉलेजों में लोक-संगीत व भाषा कार्यशालाएं शुरू करने जैसे कदम मायड़ भाषा को नई ऊर्जा दे सकते हैं।