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NEET Paper Leak Case: परीक्षा से एक दिन पहले तक बिकता रहा पेपर, सामने आया बड़ा ‘खेल’

Rajasthan News: नीट पेपर लीक मामले में कंसलटेंसी नेटवर्क की भूमिका सामने आने के बाद देशभर में चल रही जांच ने एक बार फिर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। SOG द्वारा पिछले साल चयनित नीट स्टूडेंट्स के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे है।
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May 15, 2026
NEET Paper Leak Case Update
फोटो: AI

NEET UG 2026 Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में कन्सलटेंसी की भूमिका सामने आने के बाद एक बार फिर देशभर में तेजी से फैल रहे कन्सलटेंसी नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं। जाली अंकतालिका से लेकर भर्ती परीक्षाओं और अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा तक में कथित रूप से कन्सलटेंट्स की संलिप्तता सामने आने के बावजूद इनके पंजीयन और आर्थिक गतिविधियों को लेकर कोई ठोस सरकारी व्यवस्था नहीं है। पीटीआई, फायरमैन, एनटीटी सहित कई भर्ती परीक्षाओं में जाली अंकतालिकाओं के मामलों में भी कई कन्सलटेंसी चर्चा में रही थीं।

इसके बाद पुलिस मुख्यालय स्तर से सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्र में संचालित कन्सलटेंसी संस्थानों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार कन्सलटेंसी के लिए पंजीयन और निगरानी व्यवस्था लागू करे तो फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लग सकती है।

पिछले साल चयनित विद्यार्थियों की भी जांच

जांच एजेंसियों को पिछले साल चयनित कुछ विद्यार्थियों को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। खासतौर पर एक ही परिवार के कई विद्यार्थियों के चयनित होने के मामलों में एसओजी ने रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि संबंधित विद्यार्थियों या परिवारों का पेपर माफिया से कोई पुराना संबंध तो नहीं रहा।

पहले तक बिकता रहा पेपर !

नीट परीक्षा का कथित 'गेस पेपर' परीक्षा से एक दिन पहले तक बिकने की सूचना एसओजी को मिली है। जांच एजेंसियों को विद्यार्थियों से मिली जानकारी के आधार पर आशंका है कि पेपर सोशल मीडिया के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम से भी कई जगहों पर बांटा गया।

बिना पंजीयन चल रहीं कन्सलटेंसी विद्यार्थियों को बड़ा नुकसान

  1. योग्यता नहीं, कोई भी बन रहा कन्सलटेंट: विशेषज्ञों के अनुसार देश में कन्सलटेंसी संचालकों की योग्यता तय नहीं है। कई ऐसे लोग भी कॅरियर काउंसलिंग कर रहे हैं जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि अलग संकाय की है, लेकिन वे इंजीनियरिंग, जेईई और मेडिकल जैसे क्षेत्रों में विद्यार्थियों को सलाह दे रहे हैं। इसका सीधा नुकसान युवाओं को उठाना पड़ रहा है।
  2. फीस और लेनदेन का कोई रिकॉर्ड नहीं: कई कन्सलटेंसी विद्यार्थियों से मोटी फीस लेने के बावजूद उसका पूरा रिकॉर्ड सरकारी एजेंसियों के साथ साझा नहीं करतीं। ऐसे में आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंजीयन व्यवस्था लागू हो तो आर्थिक लेनदेन की निगरानी संभव हो सकेगी।
  3. विशेषज्ञों की टीम तक स्पष्ट नहीं पंजीयन व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों को यह तक पता नहीं चल पाता कि संबंधित कन्सलटेंसी में विषय विशेषज्ञ कौन हैं और उनकी योग्यता क्या है। यदि सरकार विशेषज्ञों के नाम सार्वजनिक करने की व्यवस्था करे तो विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन मिल सकेगा।

नियम-कायदे बनने से युवाओं को मिलेगा फायदा

सरकार को कन्सलटेंसी के पंजीयन को लेकर नियम कायदे तय करने चाहिए। इससे युवाओं को फायदा मिलने के साथ सरकार की आय में भी इजाफा हो सकेगा। कई कन्सलटेंसी में विशेषज्ञों की टीम के नहीं होने के बाद कई बार युवाओं को आधी-अधूरी जानकारी दे दी जाती है जिससे फायदे की जगह नुकसान हो जाता है।
हितेश शर्मा, कॅरियर काउंसलर

Updated on:
15 May 2026 04:09 pm
Published on:
15 May 2026 02:16 pm