
धोद/सीकर। धोद क्षेत्र के सरवड़ी गांव में पड़ोसी द्वारा चाकू से गला रेतकर घायल की गई गर्भवती महिला प्रियंका कंवर (23) जिंदगी की जंग हार गईं। तीन दिन तक मौत से लड़ने के बाद शुक्रवार को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उसने अंतिम सांस ली। इससे दो दिन पहले ही अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी छह माह की अजन्मी बच्ची की भी गर्भ में मौत हो चुकी थी। एक ही वारदात ने दो जिंदगियां छीन लीं और तीन साल के मासूम बेटे के सिर से हमेशा के लिए मां का साया उठा दिया। घटना के बाद परिवार और ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर धोद थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। सरवड़ी गांव की प्रियंका कंवर के निधन ने दो परिवारों की खुशियां एक साथ उजाड़ दीं। महिला पर हमले की घटना 28 जुलाई की है।
तीन साल का बेटा अब भी मासूमियत से दरवाजे की ओर देखता है, मानो उसकी मां अभी लौट आएगी। उसे यह समझ नहीं कि मां अब कभी वापस नहीं आएगी। घटना के दौरान वह उसी झोपड़ी में मौजूद था, जहां आरोपी ने उसकी मां पर चाकू से हमला किया था। आज भी वह डरे हुए चेहरे के साथ लोगों को बताता है कि "एक छोरा आया, उसने मां को मारा और चाकू से काट दिया।"
प्रियंका पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी और परिवार की सबसे लाडली थीं। मां का पहले ही निधन हो चुका था। पति संजय सिंह महाराष्ट्र में फर्नीचर का काम करते हैं, इसलिए पिछले एक महीने से प्रियंका अपने पिता प्रहलाद सिंह के पास सरवड़ी में रह रही थीं। पिता बताते हैं कि पत्नी के बाद अब बेटी के चले जाने से बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा भी छिन गया। अब हर दिन और हर पल बेटी की कमी सालती रहेगी।
इधर, प्रियंका की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण धोद थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मामले की डीएसपी स्तर से जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, दोहरे हत्याकांड की धाराएं जोडऩे, विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने, पीडि़त परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता, मासूम बच्चे के पालन-पोषण के लिए अलग से सहायता तथा आरोपी के मकान पर बुलडोजर कार्रवाई सहित 11 सूत्रीय मांगें प्रशासन के सामने रखीं। मृतका के पिता का आरोप है कि आरोपी सुरेश सैनी घटना से एक दिन पहले ही अपना मोबाइल बंद कर चुका था और गांव से धारदार चाकू लेकर आया था।
उनका कहना है कि आरोपी ने पूरी योजना के साथ इस वारदात को अंजाम दिया। भीम सेना के संस्थापक एडवोकेट अनिल तिड़दिया ने घटना को समाज को झकझोर देने वाली बताते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने और मामले की त्वरित सुनवाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दर्द है। अभिभाषक संघ सीकर को ऐसा प्रयास करना चाहिए कि निर्दयी हत्यारे की कोई भी अधिवक्ता पैरवी नहीं करे।