Sikar RTE Admission: सीकर जिले में आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश की उम्मीद इस बार बड़ी संख्या में बच्चों के लिए टूटती नजर आ रही है। पहले चरण में लॉटरी, रिपोर्टिंग और दस्तावेजों की प्रक्रिया के बाद हजारों बच्चे दाखिले से वंचित रह गए हैं।
सीकर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पहले चरण के प्रवेश में निजी स्कूलों में निशुल्क पढ़ने की कमजोर वर्ग के 69 हजार 564 बच्चों की उम्मीद टूट गई है। आरटीई के तहत जिले में इस बार 78 हजार 184 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 55 हजार 565 विद्यार्थी पहले ही लॉटरी प्रक्रिया से बाहर हो गए थे। जिन 22 हजार 619 बच्चों का चयन हुआ, उनमें से भी तय समय पर रिपोर्टिंग और दस्तावेजों की खामियों के चलते केवल 9 हजार 360 बच्चों का ही पहले चरण में प्रवेश हो सका है।
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हालांकि प्रवेश का दूसरा चरण 21 अप्रेल से प्रस्तावित है, लेकिन उसमें भी 10 प्रतिशत से अधिक प्रवेश होने की संभावना कम मानी जा रही है। ऐसे में इस बार जिले में आवेदन करने वाले कुल विद्यार्थियों में से करीब 75 से 80 प्रतिशत बच्चे निशुल्क प्रवेश से वंचित रहेंगे।
आरटीई के तहत लॉटरी में चयन के बाद भी जिले के 4 हजार 793 विद्यार्थी निशुल्क प्रवेश से वंचित रह गए हैं। प्रथम चरण की अंतिम तिथि तक स्कूल में रिपोर्टिंग नहीं करने के कारण ऐसा हुआ। शिक्षा विभाग के अनुसार लॉटरी में चयनित 22 हजार 619 बच्चों में से 17 हजार 826 विद्यार्थियों की ही स्कूलों में रिपोर्टिंग हो पाई। इनमें से भी दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया के बाद अब तक 9 हजार 360 विद्यार्थियों का ही प्रवेश हो सका है।
आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश सबसे अधिक पिपराली ब्लॉक में हुए हैं। यहां 158 निजी स्कूलों में 20 हजार 352 आवेदनों में से 4 हजार 771 बच्चों का लॉटरी में चयन हुआ। इनमें से 3 हजार 376 बच्चों की रिपोर्टिंग और दस्तावेज सत्यापन के बाद 1 हजार 632 बच्चों का प्रवेश हो चुका है। 169 बच्चों को प्रोविजनल प्रवेश दिया गया है। इसी तरह सबसे कम प्रवेश नेछवा में हुए हैं। यहां 24 स्कूलों में 2 हजार 26 आवेदनों में से 634 बच्चों का लॉटरी में चयन हुआ। इनमें से 515 बच्चों की रिपोर्टिंग के बाद अब तक 264 बच्चों का प्रवेश हुआ है।
आरटीई के तहत प्रवेश देने में इस बार भी बड़े स्कूल पीछे हट रहे हैं। उनकी भारी फीस के मुकाबले सरकार की पुनर्भरण राशि केवल 20 से 30 प्रतिशत होने के कारण ऐसा हो रहा है। मामले में कई अभिभावकों ने शिक्षा विभाग में शिकायत कर कुछ स्कूलों पर प्रवेश देने से इनकार करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
आरटीई एक्ट के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। इनकी फीस के बदले राज्य सरकार स्कूलों को पुनर्भरण राशि देती है। केंद्र सरकार के प्रावधान के अनुसार निशुल्क प्रवेश कक्षा आठ तक होता है, लेकिन राजस्थान में इसे कक्षा 12 तक लागू किया गया है।
आरटीई के तहत प्रथम चरण की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण की प्रक्रिया 21 अप्रेल से शुरू होगी। अभिभावकों से अपील है कि वे तय समय पर रिपोर्टिंग कर बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करें। किसी प्रकार की समस्या होने पर शिक्षा विभाग कार्यालय में संपर्क करें।
सज्जन सिंह, एडीईओ (प्रा.), सीकर