
सीकर. शास्त्री नगर निवासी जितेंद्र की मौत को भले ही सात दिन गुजर चुके हैं। लेकिन, उसके बच्चों के अनुसार उनके पापा जिंदा हैं और रात को दुकान बंद करने के बाद घर जरूर लौटेंगे। हालांकि घरवालों को दिलासा देते कई दिन बीत चुके हैं। परंतु मासूम बच्चे अब अपना आपा खोते जा रहे हैं और पिता को खोजने उनका पता पूछने लगे हैं। इधर, पुलिस ने भले ही मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। लेकिन, मृतक जितेंद्र के परिजन दिन-रात सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटे हैं। ताकि घटनाक्रम में शामिल आरोपितों को खुद ढूंढ सके और दोषी को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके।
यहां देखें जितेन्द्र के शव की मिला तब की तस्वीरें
जी हां, शास्त्री नगर के जितेंद्र कुमावत का शव २३ नवंबर को बद्री विहार के पास एक खाली प्लाट में पड़ा मिला था। जबकि इससे पहले जितेंद्र दो दिन से लापता चल रहा था। जितेंद्र की पत्नी सुमन के अनुसार बाइक सर्विस की दुकान से निकलने पर शाम को साढे़ सात उन्होंने फोन किया था। कहा था कि वह शादी में शामिल होने जा रहा है। आधे घंटे बाद वापस घर लौट आएगा। साथ में यह भी कहा बताया कि बाजार से कुछ लाना है तो बता दो। इसके बाद उन्होंने मोबाइल उठाया नहीं और बाद में स्वीच ऑफ आने लगा था।
दो दिन तलाश करने के बाद उनका शव उसी शादी-समारोह स्थल के पास ही पड़ा मिलना, संदेह के घेरे में आ रहा है। इधर, जितेंद्र के भाई विनोद का कहना है कि पुलिस ने उसके भाई के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाल ली है। लेकिन, अंतिम समय इसके संपर्क में कौन लोग थे। इसका खुलासा नहीं कर रही है। ढिलाई बरतने के कारण न्याय की उम्मीद टूटती जा रही है। उनके यह बात भी गले नहीं उतर रही है कि यदि जितेंद्र की मौत बुधवार को ही हो गई थी तो दो दिन पडे़ रहे उसके शव की सूचना किसी को कैसे नहीं लगी। जबकि घटना स्थल मोहल्ले के बीच में हैं और इधर, से लोगों का आवागमन भी बराबर रहता है।
सन्नी ने कहा गुप्त रखना नाम
जितेंद्र के भाई विनोद व मनोज ने बताया कि वह अपने दोस्त सन्नी के भाई के रिसेप्शन में गया था। फुटेज सीसीटीवी कैमरे में आ रहे हैं। जबकि जितेंद्र के शादी में आने की बात से वह मुकर रहा था। शव मिलने के एक दिन पहले सन्नी ने ही उनसे कहा बताया कि जितेंद्र कल सुबह लौट आएगा। लेकिन, वह किसके साथ आता है। उसका नाम परिवाल वालों को गुप्त रखना पडेग़ा। हालांकि मामले में परिजन देवकरण व फौजी की भूमिका को भी संदिग्ध मानकर चले रहे हैं।
दिनभर मां की गोद में रहते हैं बच्चे
जितेंद्र के नौ साल की बेटी दिव्यांशी है और पांच साल का बेटा जतिन है। परिजनों ने अभी जितेंद्र की मौत की खबर इनको नहीं दी है। दोनों मासूम दिनभर मां की गोद में बैठकर यहीं सवाल कर रहे हैं कि उनके पापा कब आएंगे। हालांकि घटना के इतने दिन बाद मंगलवार को परिजनों ने उन्हें स्कूल भी भेजा। ताकि मातम भरे माहौल से उनको थोड़ा दूर किया जा सके।