Sikar News: तीन साल तक बेटे ने दिन-रात किताबों में आंखें गड़ाए रखीं। परिवार ने अपनी जरूरतें टाल दीं, ताकि एक दिन घर का बेटा डॉक्टर बन सके। इस बार उम्मीद और भी बड़ी थी। लेकिन, डॉक्टर बनने के सपने का दुखद अंत हो गया।
सीकर। तीन साल तक बेटे ने दिन-रात किताबों में आंखें गड़ाए रखीं। परिवार ने अपनी जरूरतें टाल दीं, ताकि एक दिन घर का बेटा डॉक्टर बन सके। इस बार उम्मीद और भी बड़ी थी। प्रदीप को भरोसा था कि नीट यूजी 2026 में उसके 650 से अधिक अंक आएंगे और किसी अच्छे मेडिकल कॉलेज में चयन तय है। घर में सफेद कोट के सपने सजने लगे थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन सपनों को ऐसा झटका दिया कि 23 वर्षीय प्रदीप माहिच अवसाद में चला गया।
जिस घर में मेडिकल कॉलेज में चयन की खुशियां आने वाली थीं, वहां अब पिता की खामोशी और बहनों की चीखें गूंज रही है। शुक्रवार दोपहर सीकर के पिपराली रोड स्थित जलधारी नगर में प्रदीप ने बहन की चुन्नी से फंदा बना लोहे की एंगल पर लटककर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि यह केवल बेटे की मौत नहीं, बल्कि लापरवाह व्यवस्था की हत्या है। प्रदीप मूलतः झुंझुन जिले के गुढ़ागौडजी क्षेत्र की कनिका की ढाणी का रहने वाला था। वह पिछले तीन साल से सीकर में बहन बबीता क निशा के साथ रहकर नीट की तैयारी कर रहा था। पिता राजेश कुमान मेघवाल खेतीबाड़ी कर बेटे क पढ़ाई का खर्च उठा रहे थे। प्रदीप तीन बहनों के बीच इकलौता भाई था और पूरे परिवार की उम्मीदों का केंद्र भी।
शुक्रवार दोपहर छोटी बहन निश कोचिंग गई हुई थी, बड़ी बहन बबीत नहाने गई थी। उसने बाथरूम के बाहर से कुंडी लगा दी। फिर कमने में आया। टीनशेड पर पंखा काफ नीचे था ऐसे में उसने लोहे के एंगल से चुन्नी को बांधा और लटक गया बहन बबीता गेट तोड़कर बाहर आइ और उसने भाई को पंखे से लटक देख उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने कैंची से फंदा काटकन भाई को नीचे उतारा और जोर-जोन से चिल्लाने लगी। मकान मालिक और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस प्रदीप को एसके अस्पताल लेकन पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इन आंखों में सपने थे… बेटे की कामयाबी के… उसका कॅरियर बनाने के… बेटे पर गर्व करने के… लेकिन बेटा थोड़ा सा भी तनाव सह नहीं पाया और सब को रुलाकर चला गया। यह तो निहायत ही गलत है। बच्चों को केवल अपने ही नहीं, अपने परिवार के बारे में भी सोचना चाहिए कि उनके इस तरह के गलत कदम मां-बाप, बहन भाई पर किस कदर भारी पड़ते हैं।
ग्रामीणों और पड़ोसियों के मुताबिक, नीट परीक्षा देकर प्रदीप खुशी-खुशी गांव गया था। उसने परिवार और दोस्तों से कहा था- "इस बार पक्का सलेक्शन होगा।" उसने मकान का किराया भी केवल 15 मई तक ही दिया था और कहा था कि चयन के बाद सामान घर ले आएंगे। लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद वह लगातार परेशान और मायूस रहने लगा था। प्रदीप की मौत की खबर जैसे ही कनिका की ढाणी पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया। गांव की गलियां शांत हो गई। हर किसी का जुबान पर एक ही सवाल था- जिस बेटे पर परिवार ने अपनी उम्मीदें टिका रखी थीं, आखिर वह इतना अकेला कैसे पड़ गया?
परिजन बताते हैं कि शुक्रवार सुबह प्रदीप ने पिता को फोन किया था। घर से उसके लिए दूध और छाछ बस से सीकर भेजी जाती थी। उसी बारे में उसने अपने पिता से बात की थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह बातचीत आखिरी साबित होगी।
पिता राजेश कुमार ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्वों व पेपर लीक माफियाओं ने नीट का पेपर लीक कर उसके बेटे को छीन लिया। इस बार वह सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने को लेकर काफी आशान्वित था। दो दिन पहले ताऊ का लड़का हॉस्पिटल में किसी को दिखाने आया तो उसे प्रदीप ने कहा था कि अभी थोड़ा टेंशन में चल रहा हूं।
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