
राजेश वैष्णव. दांतारामगढ़ (सीकर).
औलाद के रूप में तीन लड़के। तीनों ही ऐसी बीमारी से ग्रसित कि उठना, बैठना, खाना, पीना सब दुभर। राजस्थान के सीकर जिले के दांतारामगढ़ उपखण्ड की धौलासरी ग्राम पंचायत की गोड़ा की ढाणी निवासी हीरालाल कुमावत के परिवार के तीन सदस्य दस साल से इस बीमारी का दंश झेल रहे हैं। हीरालाल का बड़ा बेटा युगल किशोर (16), दूसरा निर्मल (9) पूरी तरह से अपाहिज हो चुके हैं, वहीं सात वर्षीय अर्जुन की हालत भी अब बड़े भाइयों जैसी होने लगी है।
एक-एक करके तीनों बेटों हो गए बीमारी से ग्रसित
हीरालाल कुमावत ने बताया कि सात साल के होते ही उसके बेटों को यह बीमारी जकड़ लेती है। युगल किशोर जब सात साल का हुआ तो उसके पैरों की नसों में खिंचाव होने लगा। ऐड़ी उठाकर चलने लगा और फिर वह चलते चलते ही गिरने लगा। डॉक्टरों को दिखाया इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दूसरा बेटा निर्मल भी जब सात साल को हुआ उसके भी यह बीमारी लग गई। दोनों पूरी तरह से अपाहिज हो गए और अब तीसरा बेटा अर्जुन सात साल का होने को है वह भी एडी उठाकर चलने लगा हैं।
हर जगह दिखाया नहीं मिली राहत
चिकित्सक के पास हर मर्ज की दवा है। लेकिन बकौल हीरालाल जयपुर के जेके लोन व सीकर में अनेक जगह चिकित्सकों को दिखाया जांचें करवाई लेकिन दो साल पहले डॉक्टरों ने जवाब दे दिया कि यह आनुवांशिक बीमारी है। इसका कोई इलाज नहीं है।
परिवार चलाना मुश्किल
हीरालाल का परिवार इतनी तंगहाली में जी रहा है कि बच्चों का इलाज करवाना तो दूर परिवार पालना भी मुश्किल हो रहा है। युगल व निर्मल उठना तो दूर की बात रेंगकर भी दो कदम आगे नहीं बढ़ सकते। हाथ से धीरे धीरे थोड़ा थोड़ा खाना खाते है, लेकिन शौच करवाना, नहलाना, सुलाना या बाहर बैठाना सभी गोद में उठाकर करना पड़ता है।
बच्चों का वजन बढऩे के कारण एक आदमी से उठाना बैठाना भी नहीं हो पा रहा है। पांचवी कक्षा तक युगल सही सलामत था इसके बाद बीमारी लगी तो माता-पिता ने गोद में ले जाकर सरकारी स्कूल से आठवीं पास करवाई। छोटा निर्मल दूसरी कक्षा में ही अपाहिज हो गया। तीसरा अर्जुन अभी दूसरी कक्षा में है, जिसे यह बीमारी घेरने लगी है।