सीकर से पलसाना के बीच करीब सवा साल बाद फिर से इंजन की सीटी गूंजी।
पलसाना/सीकर.
सीकर से पलसाना के बीच शुक्रवार को करीब सवा साल बाद फिर से इंजन की सीटी गूंजी। इतना जरूर अंतर रहा कि पहले वाला इंजन छोटा था, अब वाला बड़ा। सीकर से पलसाना जाते समय इंजन की गति धीमी रखी गई, जबकि आते समय इसकी अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रखी गई। पलसाना से सीकर आने में इंजन ने मात्र 18 मिनट का समय लिया। सीकर से जयपुर के बीच रेलवे ट्रेक को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए करीब सवा साल पहले इस ट्रेक पर छोटी लाइन की ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। अब सीकर से पलसाना तक का ब्रॉडगेज का कार्य पूरा होने के बाद शुक्रवार को ट्रायल के लिए इंजन सीकर से ट्रायल के लिए पलसाना पहुंचा। इस दौरान लोगों को एक बार फिर से लम्बे समय बाद इंजन की सीटी सुनने को मिली। सुबह 11 बजे जैसे ही ट्रायल के लिए ब्रॉडगेज का इंजन पहली बार पलसाना स्टेशन पहुंचा तो काफी संख्या में ग्रामीण स्टेशन पर पहुंच गए और इंजन के साथ आए स्टाफ सदस्यों का स्वागत किया। । गौरतलब है कि शेखावाटी को राजधानी जयपुर से जोडऩे वाले इस मीटरगेज रेलवे ट्रेक को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए अक्टूबर 2016 में ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। इस ट्रेक पर सीकर से जयपुर तक का काम दो चरणों में पूरा किया जाना था। जिसमें पहले चरण में सीकर से रींगस और दूसरे चरण में रींगस से जयपुर तक का काम पूरा किया जाना था। लेकिन काम में हुई देरी के कारण अब ये काम तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। फिलहाल सीकर से पलसाना तक का काम पूरा होने के बाद यहां ट्रायल पूरी कर जल्द ही ट्रेन भी चला दी जाएगी। इसके बाद रींगस तक का काम पूरा होने के बाद सीकर से रींगस तक ट्रेन शुरू की जाएगी।
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