इस युद्ध में तंवरावाटी क्षेत्र के ग्राम टोडा के कैप्टेन राम सिंह तंवर, ग्राम भूदौली के निवासी दिवंगत कमांडो बलवीर सिंह तंवर, ग्राम डाबला के दिवंगत कमांडो हनुमान सिंह तंवर व ग्राम डाबला निवासी कमांडो मदन सिंह तंवर ने अहम भूमिका निभाई थी।
Surgical strike in Pakistan: तंवरावाटी के योद्धाओं ने 7 दिसंबर 1971 में 10 पैरा कमांडो बटालियन में रहकर पाकिस्तान में घुसकर प्रथम सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के पिता जयपुर के पूर्व महाराजा महावीर चक्र ब्रिगेडियर भवानी सिंह के नेतृत्व में 10 पैरा कमांडो बटालियन ने 7 दिसबर 1971 का सूर्योदय होने से पहले पाकिस्तान में 80 किलोमीटर घुसकर वहां के छाछरो नामक शहर पर कब्जा कर लिया था।
इस युद्ध में तंवरावाटी क्षेत्र के सीकर के ग्राम टोडा के कैप्टेन राम सिंह तंवर, ग्राम भूदौली के निवासी दिवंगत कमांडो बलवीर सिंह तंवर, ग्राम डाबला के दिवंगत कमांडो हनुमान सिंह तंवर व ग्राम डाबला निवासी कमांडो मदन सिंह तंवर ने अपना युद्ध कौशल दिखाते हुए पाकिस्तान के छाछरो शहर पर कब्जा करने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। सर्जिकल स्ट्राइक में सेना व खुफिया एजेंसियों में समन्वय स्थापित कर लक्ष्य को प्राप्त किया जाता है।
ऐसे में छाछरो पर कब्जा करने के लिए हमारे पास 10 पैरा कमांडो जैसी मजबूत बटालियन, जिसका नेतृत्व महावीर चक्र ब्रिगेडियर भवानी सिंह जैसे बहादुर योद्धा के हाथों में था। जरूरत थी मजबूत खुफिया एजेंसी की। उसकी भूमिका निभाई बाड़मेर जिले के निवासी ठाकुर बलवंत सिंह बाखासर ने, वैसे तो बलवंत सिंह गरीबों के हितेषी एक डाकू थे पर जब राष्ट्र धर्म की बात आई तो 10 पैरा कमांडो बटालियन के साथ रहकर पाकिस्तान के छाछरो क्षेत्र के चप्पे चप्पे के बारे में जानकारी दी।