मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का परिणाम घोषित
सिंगरौली। माध्यमिक शिक्षा मण्डल मध्य प्रदेश भोपाल ने सोमवार को 10वीं एवं 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए। परीक्षा परिणाम के मुताबिक 10वीं कक्षा में जिले का रिजल्ट 45.47 फीसदी के साथ 50 वें स्थान पर है। विंध्य क्षेत्र में सीधी, रीवा का भी रिजल्ट संतोषजनक नहीं है। सीधी और सिंगरौली का बेहद खराब है। सिंगरौली का रिजल्ट बहुत ही कम है। हालांकि हाईस्कूल में जिले के तीन होनहार प्रदेश की टॉप टेन सूची में जगह बनाने में सफल रहे।
इनमें शिवानी कुमारी पिता राजनारायण गोड़ निवासी ढोंटी विंध्यनगर 487 नवमां स्थान सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय विंध्यनगर, पुष्पा शाह पिता जोगेन्द्र शाह 486 निवासी जमुआ बैढऩ 486 दसवां स्थान सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैढऩ, अभिषेक बैस पिता गायत्री सरस्वती 486 दसवें स्थान पर रहे।
हायर सेकण्डरी में 62.76 के साथ 32 वें स्थान पर
हायर सेकण्डरी स्कूल में जिले की स्थिति बहुत अच्छी तो नहीं है लेकिन संतोष जनक है। प्रदेश में जिला 62.76 अंको के साथ 32वें स्थान पर है। विंध्य में 63.63 के साथ सतना प्रदेश में 28 नंबर पर है। जो सिंगरौली से उपर है। सीधी 56.11 फीसदी के साथ प्रदेश में 40 वें नंबर पर है। रीवा की हालत ज्यादा खराब है। रीवा 49.48 फीसदी के साथ प्रदेश में 45वें नंबर पर है। विंध्य में सबसे नीचे रीवा ही है।
1. अभिषेक को दसवां स्थान
486 अंकों के साथ अभिषेक बैस ने प्रदेश की मैरिट सूची में दसवां स्थान बनाया है। अभिषेक की इस सफलता से उसके माता- पिता काफी प्रोत्साहित हैं। अभिषेक शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहा है। हर कक्षा में उसके अच्छे अंक आते रहे हैं। प्रदेश की मैरिट सूची में नाम आने से अभिषेक के गुरुजनों ने बधाई दी है। अभिषेक जिले का एकलौता छात्र है जो प्रदेश की मैरिट सूची में स्थान बनाने में सफल रहा।
2. सब्जी बेचकर बच्ची को पढ़ाया
बैढऩ से करीब सात किमी दूर छोटे से गांव जमुआ की बेटी पुष्पा शाह ने प्रदेश में जिले का नाम रोशन किया है। पुष्पा शाह शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे अंक लाती रही हैं। हर कक्षा में उनका प्रथम स्थान ही आता रहा है। पढ़ाई के प्रति बच्ची की लगन को देखकर माता पिता ने भी उसका बखूबी साथ दिया। पुष्पा शाह के पिता जोगेन्द्र शाह कोई सरकारी या प्राइवेट नौकरी में नहीं हैं और नहीं कोई बड़े जमीदार। अपना खुद का छोटा व्यवसाय है। बाजार में सब्जी बेंचते हैं। उससे जो आमदनी हो जाती है, उनका घर परिवार चलता है। पुष्पा की मॉ घर पर ही काम करती हैं। एक बेटी और एक बेटा है। बेटी पुष्पा शाह बड़ी है। बेटी की सफलता से माता - पिता काफी गदगद हैं। वे कहते हैं कि खेत में जो हमने मेहनत कर बच्ची को पढ़ाया। बच्ची ने उसे सफल कर दिया। पुष्पा शाह बताती हैं कि खाली समय में सिलाई बुनाई कर कुछ सीखने का प्रयास करती हूं, लेकिन मेरा उद्देश्य पढ़ाई करना ही है। बताया कि हमे इतना तो भरोसा था कि जिले में स्थान बना लूंगी लेकिन प्रदेश के लिए नहीं। हमारे गुरुजनों ने हमें यह भरोसा दिलाया की तुम प्रदेश में स्थान बना सकती हो। इसके बाद मैने भी अच्छी तैयारी की और सफल हुए। पुष्पा का कहना है कि नियमित रूप से पढ़ाई कर सफलता अर्जित की जा सकती है। कहती हैं वह सुबह पांच बजे जगकर पढ़ाई करती थी।
3. पिता दसवीं पास, बच्ची प्रदेश की मैरिट सूची में
हर माता-पिता का यह सपना होता है कि वह भले ही नहीं पढ़ पाया हों, लेकिन बच्चों को अच्छी तरह से पढ़ाएगा। ऐसा ही 20 वर्ष पहले बनारस से सिंगरौली आकर अपना व्यापार करने वाले राजनारायण गोड़ भी कर रहे हैं। राजनारायण गोड़ के चार बच्चों में सबसे छोटी बच्ची शिवानी ने कमाल कर दिया। सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय विंध्यनगर की छात्रा शिवानी ने दसवीं कक्षा में प्रदेश की मैरिट सूची में नौवां स्थान बनाया है। राजनारायण कहते हैं कि उनके चार बच्चों में सभी पढ़ाई में अच्छे रहे लेकिन सबसे छोटी बच्ची शिवानी उन्हें भी पीछे छोड़ दिया। शिवानी की सफलता से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। वैसे तो इस सफलता का श्रेय शिवानी को ही जाता है जिन्होंने कड़ी मेहनत कर यह इस मुकाम तक पहुंची हैं, लेकिन वे अपनी इस सफलता के लिए गुरुजनों के साथ ही माता-पिता को भी श्रेय दे रही हैं। वे कहतीं है कि मां बेला देवी प्रतिदिन सुबह उसे जगाती थी।