सिंगरौली

सीधी – सिंगरौली टू लेन की लागत पांच गुना बढ़ी, एमपीआरडीसी ने मांगे 100 करोड़

इस सड़क के निर्माण में अब तक करीब 21 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं

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sidhi Singrauli National Highway 75

सिंगरौली. सीधी - सिंगरौली टू लेन का काम फिलहाल जल्द पूरा हो पाएगा ऐसी संभावना बहुत कम है। ऐसा इसलिए की सड़क बनाने के लिए एमपीआरडीपीसी के पास रुपए नहीं है। 2010 से बन रही इस सड़क के निर्माण में अब तक करीब 21 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इस मार्ग के लिए 27 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे।

अब एमपीआरडीपीसी ने रुपए नहीं होने की बात कहकर काम बंद कर दिया है। दोबारा काम शुरू करने के लिए 100 करोड़ रुपए मांगे गए हैं। एमपीआरडीसी को जब तक रुपए नहीं मिल जाते तब तक काम नहीं शुरू हो पाएगा।

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इस प्रकार लोगों को गर्मी में इसी धूल भरी एवं बरसात में कीचड़ से सनी सड़क पर चलने की मजबूरी होगी।

सीधी सिंगरौली सड़क जिले के प्रमुख प्रोजेक्ट में से एक है। इस मार्ग की अहमियत सांसद रीति पाठक अच्छी तरह से समझती हैं। यही वजह है कि जब भी मौका मिला संसद में इस मुद्दे को उठाया। हालांकि इसके बावजूद जमीन पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। अब न केवल आम लोग बल्कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी भी सड़क को लेकर सांसद से सवाल पूछ रहे हैं।

सड़क की वर्तमान हालत यह है कि चार पहिया वाहन की बात तो दूर उसमें दो पहिया वाहन में भी चलना मुश्किल है। खासकर बहरी से देवसर, देवसर से बरगवां एवं बरगवां से मोरवा तक का मार्ग पूरी तरह से खराब है। पिछले वर्षों की तरह ही इस बरसात में भी कई दिनों तक वाहनों के कीचड़ में धसे रहने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक सत्ता पक्ष के विधायक भी नाराज है। ऐसा इसलिए की उन्हें भी उस मार्ग की अहमियत मालुम है। लोगों के बीच जवाब देते मुश्किल हो रही है। यही वजह है कि विधायकों ने सांसद एवं जिला प्रशासन के सामने इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा है। पिछले दिनों दिशा की हुई बैठक में विधायकों ने बेहद नाराजगी जताई थी।

पिछले करीब सात वर्ष से बन रही सीधी - सिंगरौली सड़क काम अधूरा पड़ा हुआ है। बहरी से लेकर देवसर, बरगवां एवं मोरवा की सड़क पर महज दिखावा हो रहा है। कहीं - कहीं एक - दो पोकलैंड मशीन गड्ढा खोदते दिख जाती हैं। अन्यथा पूरा काम बंद पड़ा हुआ है। यह काम पिछले करीब डेढ़ वर्ष से बंद है।

बहरी से मोरवा तक 50 से ज्यादा पुलिया अधूरे
बहरी से लेकर मोरवा तक करीब पांच बड़े पुल एवं अन्य छोटे - छोट पुल बनाने हैं। सभी पुल अधूरे पड़े हुए हैं। पुरानी पुल भी तोड़ दी गई है या फिर अब चलने लायक नहीं रह गई है। नई पुल का निर्माण अभी पूरा हुआ नहीं है।

सबसे बड़ी पुल गोपद पुल है। उस पुल का काम अधूरा है। इसके बाद देवसर से बरगवां के बीच दो बड़ी पुल बनानी है। जिसमें एक सजहर से पहले एवं एक झुरही की पुल है। दोनों पुल अधूरे पड़े हुए हैं। यहा पर पुराने पुल की हालत भी काफी खराब हो गई है।

बरसात में इन पुलों को पार करना बेहद मुश्किल होगा। विशेषकर यात्री एवं भारी बाहनों के लिए जोखिम भरा होगा।

टेक्नो यूनिक को दिया गया है काम
सीधी सिंगरौली सड़क निर्माण एजेंसी टेक्नो यूनिक है। टेक्नो यूनिक अत्यंत धीमी गति से निर्माण कराता रहा। जिसकी वजह से समय गुजरता गया और सड़क की लागत भी बढ़ती गई। पिछले छह वर्षों के दौरान सड़क की लागत पांच गुना बढ़ गई। जबकि काम 30 फीसदी भी पूरा नहीं हो पाया।

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Updated on:
18 Jun 2018 04:45 pm
Published on:
18 Jun 2018 12:47 pm
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