Abu Road Fake Certificates: आबूरोड ब्लॉक में वीडीओ आईडी के दुरुपयोग से करीब 400 फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनने का मामला सामने आया है, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
आबूरोड। सिरोही जिले के आबूरोड ब्लॉक में पहले फर्जी दिव्यांग और टीएसपी प्रमाण-पत्रों के मामले सामने आने के बाद अब वीडीओ की आईडी से करीब 400 फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाए जाने का प्रकरण उजागर हुआ है। एक के बाद एक सात ग्राम पंचायतों में फर्जी प्रमाण-पत्र मिलने से ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो ब्लॉक में फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने की फैक्ट्री चल रही हो।
इधर, मामला सामने आने पर जिला कलक्टर रोहिताश सिंह तोमर के निर्देश पर सात ग्राम विकास अधिकारियों और एक कनिष्ठ सहायक को निलंबित कर दिया गया। साथ ही तीन पंचायतों में संदिग्ध तीन ई-मित्र केंद्रों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। जिला कलक्टर ने कमेटी गठित कर ब्लॉक की सभी 32 ग्राम पंचायतों में पिछले तीन वर्षों में बने जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्रों की नए सिरे से जांच के निर्देश दिए हैं। नवगठित कमेटी 10 दिन में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद अन्य पंचायतों में भी मामले सामने आने की संभावना है।
कलक्टर के निर्देश पर फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र के मामले में सीईओ ने सियावा पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी गौरव बारोठ, गणका के बाबूलाल सैनी, उपलागढ़ के धर्मेंद्र मिश्रा, उपलागढ़ के तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी प्रभुराम मीणा, खड़ात के ऋषि सैनी, सियावा के तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी नितिन शर्मा, निचलागढ़ के अशोक कुमार और सियावा पंचायत की कनिष्ठ सहायक मोनिका को निलंबित किया है।
पूर्व में ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम ने गणका पंचायत में 58, खड़ात में 96 फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र तथा सियावा में 23, खड़ात में 42, गणका में 55, उपलागढ़ में 129 और निचलागढ़ में 40 फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाए जाने के मामले उजागर किए हैं। इनका कोई रिकॉर्ड पंचायत में उपलब्ध नहीं मिला। गणका और खड़ात ग्राम पंचायत के वीडीओ ने इस संबंध में सदर पुलिस थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है।
कलक्टर के आदेश पर माउंट आबू उपखंड अधिकारी अंशु प्रिया (आईएएस) की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है। इसमें आबूरोड तहसीलदार पन्नाराम चौधरी, ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी सतीशचंद्र पुरोहित, आबूरोड पंचायत समिति के अतिरिक्त विकास अधिकारी भंवरलाल लुहार, गोविंद चौधरी (अतिरिक्त निदेशक, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, सिरोही), माउंट आबू नायब तहसीलदार कुंजबिहारी झा और पिंडवाड़ा ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी अंकित मांड्या शामिल हैं। कमेटी 1 जनवरी 2023 से 31 मार्च 2026 तक 32 पंचायतों में बने जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्रों की गहन जांच करेगी।
राजस्थान पत्रिका ने 17 मार्च को ‘अब हर ग्राम पंचायत में होगी गहन जांच, व्यक्ति मृत या जिंदा, इसकी जुटाई जाएगी जानकारी’ तथा 3 अप्रेल को ‘अब वीडीओ की आईडी से 154 जन्म प्रमाण-पत्र बनाने के मामले सामने आए, 289 बन चुके मृत्यु प्रमाण-पत्र’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले को प्रमुखता से उठाया था।
फर्जी प्रमाण-पत्र प्रकरण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी मांगी है। 17 मार्च को प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए 18 मार्च को मुख्यमंत्री कार्यालय ने आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय से तथ्यात्मक जानकारी तलब की है।
माउंट आबू उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी आबूरोड ब्लॉक की सभी पंचायतों में जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्रों की जांच करेगी।
जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने के मामले में आबूरोड ब्लॉक में संदिग्ध आधार पर सियावा, उपलागढ़ और जांबुडी के ई-मित्र केंद्रों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। अब कमेटी जांच करेगी, फिलहाल इससे अधिक कुछ कहना उचित नहीं होगा।