
आबूरोड. दिवाली पर शहर ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी पटाखों के कारण आग की सर्वाधिक घटनाएं होती हैं। उपखण्ड क्षेत्र में पंचायत समिति पर दमकल वाहन नहीं होने के कारण नुकसान ज्यादा होता है। आबूरोड में नगर पालिका की ओर से फायर स्टेशन का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में आदिवासी भाखर क्षेत्र में भी आग लगने पर आकराभट्टा से वाहन जाता है। दमकल पहुंचने तक कई बार आग सब कुछ लील जाती है जबकि प्रशासन की ओर से इसे लेकर कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। भाखर क्षेत्र में दूर दराज घर होने के कारण दमकल मौके पर नहीं पहुंच पाती।
जानमाल की होती है हानि
ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे घर होने एवं फसल को घर के आस-पास रखने के कारण पटाखों से आग लगने की घटनाएं होती हैं। ऐसे में जानमाल की हानि भी हो जाती है। भाखर क्षेत्र के लिए दमकल की व्यवस्था को लेकर ग्रामीण कई बार मांग कर चुके हैं।
वाहन में नहीं दम
आकराभट्टा दमकल केन्द्र पर छोटा वाहन है। इसमें पानी की क्षमता ही महज तीन हजार लीटर की ही है। आग की बड़ी घटना होने पर इतने पानी से सिर्फ फुहारें ही पड़ सकती हैं। यहां ज्यादतर घटनाओं में दो निजी कंपनी की दमकल मौके पर पहुंचती हैं। आबूरोड जिले का सबसे बड़ा शहर है। आबादी भी साठ हजार के करीब है। दो इंडस्ट्रीयल एरिया व दो ग्रोथ सेन्टर हैं। आसपास का ग्रामीण इलाका भी बड़ा है। इसके बाद भी गंभीर समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।