सिरोही

नक्की झील किनारे खड़ा टी-55 आज भी सुनाता है भारतीय सेना के पराक्रम की कहानी, 58 पाक टैंकों को किया था नेस्तनाबूद

टी-55 टैंक को भारतीय सेना में 1967-68 के दौरान शामिल किया गया था। 1971 के युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर इस टैंक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पाकिस्तान के कई टैंकों को तबाह किया।
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Aug 15, 2026
t 55 tank
नक्की झील परिक्रमा पथ पर स्थापित किया गया टी-55 टैंक। Photo- Patrika

सिरोही/माउंट आबू @पत्रिका. 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के अद्भुत शौर्य और पराक्रम की गाथाएं आज भी देशवासियों में राष्ट्रप्रेम का जज्बा भरती हैं। इसी गौरवशाली इतिहास की याद माउंट आबू में स्थापित टी-55 टैंक भी दिलाता है। नक्की झील परिक्रमा पथ पर कानोरा घाट के समीप दयानंद गार्डन में स्थापित यह टैंक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले सैलानी टैंक को निहारने के साथ उसके साथ सेल्फी लेकर भारतीय सेना के वीर जवानों की शौर्यगाथा को याद करते हैं।

जानकारी के अनुसार टी-55 टैंक को भारतीय सेना में 1967-68 के दौरान शामिल किया गया था। 1971 के युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर इस टैंक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पाकिस्तान के कई टैंकों को तबाह किया। करीब पांच साल पहले स्थानीय प्रशासन, आर्मी और नगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में इसे सार्वजनिक अवलोकन के लिए दयानंद गार्डन में स्थापित किया गया था। नगरपालिका की ओर से इसके रखरखाव के लिए गार्ड भी नियुक्त किया गया है।

पाकिस्तान के 58 पेटेन टैंकों को किया था नेस्तनाबूद

जानकार सूत्रों के मुताबिक 1971 के युद्ध में टी-55 टैंक ने पाकिस्तान के 58 पेटेन टैंकों को नेस्तनाबूद किया था। भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर के प्रमुख टैंकों में शामिल टी-55 ने शकरगढ़, फाजिल्का, छंब से लेकर जैसलमेर और लोंगेवाला तक पाकिस्तानी टैंकों के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाई।

युवाओं में भर रहा देशभक्ति का जज्बा

माउंट आबू में स्थापित यह टैंक युवाओं को भारतीय सेना के शौर्य और वीरता से रूबरू करा रहा है। करीब 36 टन वजनी इस युद्धक टैंक को देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं और इसके साथ यादगार सेल्फी लेते नजर आते हैं।

ये है T-55 टैंक की खासियत

36 टन वजनी T-55 टैंक भारतीय सेना के उन युद्धक टैंकों में शामिल रहा है, जिसने कई महत्वपूर्ण अभियानों में अपनी ताकत और क्षमता का प्रदर्शन किया। इसमें एक साथ चार क्रू मेंबर तैनात रहते हैं। टैंक को दुश्मन के ठिकानों पर भारी गोलाबारी करने के लिए डिजाइन किया गया था। इसके अलावा इसमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन भी लगी होती है, जिससे यह हवाई खतरों से निपटने में सक्षम था। इसकी मारक क्षमता करीब 14 किलोमीटर तक बताई जाती है।

1971 के भारत - पाकिस्तान युद्ध में T- 55 टैंकों ने भारतीय सेना के कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई। इन टैंकों की ताकत ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भारतीय सैनिकों को बढ़त दिलाने में मदद की। आज भी T-55 भारतीय सेना के गौरवशाली सैन्य इतिहास और वीरता की याद दिलाता है।

Updated on:
15 Aug 2026 05:27 pm
Published on:
15 Aug 2026 05:22 pm