
Sirohi News : आबूरोड/सिरोही. प्रदेश के गांवों और ढाणियों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए शुरू की गई सचल जल परीक्षण प्रयोगशालाओं (मोबाइल लैब) के पहिए करीब ढाई साल से थमे हुए है। चार संभागों के 20 जिलों में संचालित इस व्यवस्था के तहत गांवों और ढाणियों में पहुंचकर पेयजल स्रोतों के पानी की मौके पर ही जांच की जाती थी। करीब सात साल तक इस व्यवस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी में अहम भूमिका निभाई, लेकिन दोबारा टेंडर नहीं होने से यह सुविधा बंद हो गई। इससे जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है और करीब 200 संविदाकर्मी भी बेरोजगार हो गए है। वर्तमान में गांवों में जलस्रोतों से पानी के नमूने एकत्र करने की जिम्मेदारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की एएनएम के पास है। वे हैंडपंप, ट्यूबवेल और पानी की टंकियों सहित अन्य पेयजल स्रोतों से नमूने लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजती है। इस प्रक्रिया में नमूने पहुंचने और जांच रिपोर्ट मिलने में समय लगता है।
जोधपुर संभाग : जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर, सिरोही, पाली और जोधपुर।
उदयपुर संभाग : उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद।
अजमेर संभाग : अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक और नागौर।
कोटा संभाग : कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी।
सचल जल परीक्षण प्रयोगशाला की सुविधा करीब ढाई साल से बंद है। इसे दोबारा शुरू करने के संबंध में दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। वर्तमान में एएनएम गांवों में पेयजल स्रोतों के नमूने लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजती हैं।
भोमाराम, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, सिरोही
मोबाइल लैब के जरिए गांवों और ढाणियों में पहुंचकर जलस्रोतों के पानी का जीवाणु एवं रासायनिक परीक्षण मौके पर ही किया जाता था। जांच रिपोर्ट तत्काल जलदाय विभाग के मुख्यालय भेजी जाती थी। किसी जलस्रोत के पानी में अशुद्धियां मिलने पर विभाग बिना देरी आवश्यक उपचारात्मक कदम उठाता था। अब यह व्यवस्था बंद होने से दूषित पानी की समय पर पहचान और उस पर कार्रवाई में देरी की आशंका है। इससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उम्मीद की जाती है कि जल्द से जल्द सचल जल परीक्षण प्रयोगशाला (मोबाइल लैब) व्यवस्था सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी।