
लाल घेरे में युवा सरपंच मेवा कुमारी
राजस्थान के पंचायती राज चुनावों के बीच कई रोचक खबरें सामने आ रही हैं। इन्हीं में से एक दिलचस्प और प्रेरणादायक खबर सिरोही जिले से आई है। दरअसल जिले के रेवदर क्षेत्र के तहत आने वाली नवगठित मंदार पंचायत समिति की जामठा ग्राम पंचायत में लोकतंत्र की एक नई मिसाल कायम हुई है। यहां मेवा कुमारी हीरागर नाम की महज 21 वर्ष की युवा ने इतिहास रच दिया है। खास बात ये है कि मेवा कुमारी ने अपने जीवन में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए मतदान किया और इसी पहले चुनाव में ही उसे जीत हासिल हो गई। इस जीत के साथ ही मेवा कुमारी ने जामठा पंचायत की पहली सरपंच की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया।
इधर मेवा कुमारी की इस शानदार और ऐतिहासिक जीत के बाद क्षेत्र में जश्न का माहौल है और हर कोई इस युवा बेटी के हौंसले की तारीफ़ करते नहीं थक रहा है।
मेवा कुमारी हीरागर 21 वर्ष की युवा हैं जो अब मंदार पंचायत समिति की सबसे युवा सरपंच बन गई हैं। दिलचस्प बात ये है कि अभी पिछले साल ही उन्होंने 12वीं कक्षा पास करते हुए अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है। वे अनुसूचित जाति के सरगरा समाज से ताल्लुक रखती हैं।
अद्भुत संयोग ये है कि मेवा कुमारी ने जीवन में पहली बार खुद वोट डालना और उसी चुनाव में प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरकर जीत हासिल की, जो अपने आप में एक दुर्लभ और रिकॉर्ड-तोड़ उपलब्धि है।
पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के तहत शनिवार, 24 अक्टूबर को जामठा ग्राम पंचायत के लिए मतदान संपन्न हुआ था। मंदार और जामठा दोनों ही नए प्रशासनिक क्षेत्र (नवगठित पंचायत समिति व ग्राम पंचायत) हैं, जहाँ पहली बार चुनाव कराए गए हैं।
शनिवार को मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर रात तक वोटों की गिनती का दौर चला। जैसे ही परिणाम घोषित हुए और मेवा कुमारी हीरागर की जीत की अधिकारिक घोषणा हुई, समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।
जीत हासिल करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए युवा सरपंच मेवा कुमारी ने अपनी प्राथमिकताओं खुलकर साझा कीं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य नवगठित जामठा ग्राम पंचायत को विकास के मामले में एक 'मॉडल पंचायत' के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि वे गांव की बुनियादी समस्याओं जैसे पक्की सड़कें, शुद्ध पेयजल, शिक्षा के स्तर में सुधार और महिलाओं के उत्थान के लिए पूरी ईमानदारी से काम करेंगी तथा ग्रामीणों की हर उम्मीद व आकांक्षा पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगी। 21 साल की उम्र में गांव की कमान संभालने वाली मेवा कुमारी की यह सफलता ग्रामीण राजस्थान की बदलती तस्वीर और युवा नेतृत्व की ताकत का एक बेहतरीन उदाहरण बन गई है।
Updated on:
2 Nov 2026, 11:26 AM IST
Published on:
2 Nov 2026, 11:21 AM IST
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