सिरोही: जिले के सिरोडी के 30 वर्षीय हर्षित संघवी 27 जून को लेंगे जैन दीक्षा, पावापुरी में तय हुआ मंगल मुहूर्त और संयम का दिन, मुहूर्त पत्र मिलने के बाद परिवार और समाज के लोगों में खुशी और भावुकता दिखाई दी।
सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले के सिरोडी गांव के हर्षित संघवी इन दिनों पूरे जैन समाज में चर्चा का विषय बने हुए है। 30 वर्षीय हर्षित कुमार संघवी ने सांसारिक जीवन छोड़कर संयम के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया है। हर्षित की दीक्षा 27 जून 2026 को होगी। गुरुवार को पावापुरी तीर्थ-जीव मैत्रीधाम में दीक्षा का मंगल मुहूर्त घोषित किया गया। जैसे ही हर्षित संघवी पावापुरी पहुंचे, वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे, अक्षत वर्षा और जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। माहौल पूरी तरह भावनाओं से भरा नजर आया।
मुख्य द्वार से हर्षित संघवी को जुलूस के रूप में उपाश्रय तक ले जाया गया। यहां आचार्य रविरत्नसूरीश्वर, जयेशरत्नसूरीश्वर और पन्यास वैराग्यरत्न विजय सहित कई साधु-साध्वियों की निश्रा में दीक्षा का मंगल मुहूर्त ग्रहण कराया गया। आचार्य कलापूर्णसूरीश्वर के शिष्य आचार्य पूर्णचंद्रसूरीश्वर ने हर्षित को आशीर्वाद देते हुए 27 जून 2026 की तिथि घोषित की। मुहूर्त पत्र मिलने के बाद कुंकुम और अक्षत से वधावणा की गई। इस दौरान परिवार और समाज के लोगों में खुशी और भावुकता दोनों दिखाई दी।
हर्षित संघवी के दीक्षा लेने को परिवार की वर्षों पुरानी भावना से जोड़कर देखा जा रहा है। कार्यक्रम में मौजूद उनके माता-पिता रेखा बेन और जितेंद्र संघवी काफी भावुक नजर आए। श्रद्धालु उन्हें बधाई देते दिखे। पावापुरी न्यास मंडल की ओर से प्रबंधक सुरेंद्र जैन ने हर्षित और उनके माता-पिता का तिलक, माला और साफा पहनाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में सिरोडी, कृष्णगंज, वेलांगरी, पामेरा, पोसिंतरा और अनादरा समेत आसपास के कई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य रविरत्नसूरीश्वर ने सूरिमंत्र साधना की पांचवीं बार की चौथी श्रीदेवी पीठिका जाप साधना का शुभारंभ भी कराया। यह साधना आगामी 25 दिनों तक मौनपूर्वक जारी रहेगी। इस अवसर पर केपी संघवी परिवार के प्रमुख किशोर संघवी, न्यासी नवलमल तातेड, महावीर जैन सहित कई समाजजन मौजूद रहे। पूरे आयोजन में धार्मिक अनुशासन और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
जैन धर्म में दीक्षा को सांसारिक मोह-माया छोड़कर संयम, तप और साधना के जीवन में प्रवेश माना जाता है। कम उम्र में दीक्षा लेने वाले युवाओं को समाज में विशेष सम्मान की नजर से देखा जाता है। आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग जुड़ते हैं। लोगों के जुड़ने को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भावनाओं और आस्था से जुड़ा क्षण माना जाता है।