15 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान के मजदूरों को मिल रहा हरियाणा, गुजरात और तमिलनाडु से भी कम वेतन, मजदूर संगठनों का दावा

Rajasthan Labour News: राजस्थान के मजदूर संगठनों बढ़ती महंगाई के बीच राजस्थान न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर 26 हजार रुपए न्यूनतम वेतन की मांग तेज कर दी है। संगठनों ने यह भी दावा किया कि राजस्थान की न्यूनतम मजदूरी कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है।

2 min read
Google source verification
Rajasthan Workers Organization Conference

राजस्थान मजदूर संगठन की बैठक Image Source: ChatGpt

जयपुर: राजधानी में गुरुवार को मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों और सामाजिक समूहों की एक बैठक हुई। इस बैठक में बढ़ती महंगाई, कम मजदूरी और मजदूरों के हालात को लेकर चिंता जताई गई। यह सम्मेलन दुर्गापुरा के राजस्थान समग्र सेवा संघ में रखा गया। जिसमें लगभग 30 संगठनों ने मिलकर राजस्थान के मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 26 हजार रुपए प्रति महीने करने का प्रस्ताव रखा। सम्मेलन में मजदूरों के जीवन स्तर, परिवार का खर्च और बढ़ती महंगाई पर बात हुई।

संगठनों ने कहा कि अभी जिस मजदूरी में मजदूर काम करते है उसमें उनका परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। खर्चे बढ़ रहे है और उसके सामने मजदूरी कम हो रही है। बैठक में संगठनों ने यह भी दावा किया कि राजस्थान की न्यूनतम मजदूरी कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है। उन्होंने बताया कि दिल्ली, केरल, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों में न्यूनतम मजदूरी काफी अधिक है।

सम्मेलन में रखी गई मांगे

बैठक में सभी संगठनों ने मिलकर राजस्थान न्यूनतम मजदूरी संघर्ष मोर्चा बनाने का भी फैसला लिया। इस संघर्ष मोर्चा का उद्देश्य राजस्थान में मजदूरों की मजदूरी, महंगाई भत्ता और मजदूरों के मुद्दे हल करना होगा।

सम्मेलन में यह भी मांग रखी गई कि मजदूरी को कागजी आंकड़ों से नहीं समझना चाहिए बल्कि असल में चल रही महंगाई और रोज के खर्चों के आधार पर तय करना चाहिए। संगठनों ने कहा कि हर छह महीने में परिवर्तनशील महंगाई भत्ता अर्थात महंगाई के साथ बढ़ने वाला पैसे पर ध्यान देना जरूरी है ताकि मजदूरों की आय महंगाई के साथ बैलेंस बना सके।

सम्मेलन में मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक निखिल डे ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है बल्कि मजदूरों के सम्मान और समानता से जुड़ा मुद्दा है। आगे उन्होनें कहा कि मजदूरों को ऐसा वेतन मिलना चाहिए जिससे वे महंगाई के इस बढ़ते दौर में अच्छा और सम्मानजनक जीवन जी सकें। सीआईटीयू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) के राजस्थान अध्यक्ष रवींद्र शुक्ला ने अभी के वेतन ढांचे को मजदूर विरोधी बताया और इसको लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की जरूरत बताई।

जनता का मजदूर आयोग बनाने की मांग

सम्मेलन में एक और प्रस्ताव रखा गया जिसमें जनता का मजदूर आयोग बनाने की मांग की गई। बताया गया कि इस आयोग में मजदूरों के प्रतिनिधि, ट्रेड यूनियन और श्रम विशेषज्ञ शामिल किए जाए। इस आयोग का काम उचित मजदूरी तय करने की सिफारिश करना होगा।

बैठक में कहा गया कि पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खाने-पीने की चीजों, किराया, इलाज, पढ़ाई और आवागमन का खर्च तेजी से बढ़ा है। लेकिन उसकी तुलना में मजदूरी में बढ़ोतरी उतनी नहीं हुई है। इसलिए मजदूर दबाव महसूस करते है।