सिरोही

आबूरोड में 43 ग्राम पंचायतों के 87 गांवों के लोग बे-बस, ग्रामीणों को अधिक किराया चुकाने की मजबूरी

Rajasthan Roadways: आबूरोड ब्लॉक के 87 गांव आज भी रोडवेज बस सेवा से वंचित हैं। बस सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों और श्रमिकों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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May 27, 2026
फाइल फोटो- पत्रिका

आबूरोड। गांवों को रोडवेज बस परिवहन सेवा से जोड़ने के लिए सरकार अनुबंधित बसों के जरिए सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है, लेकिन अधिकांश जिलों में ठेकेदार फर्म इसमें रुचि नहीं दिखा रही हैं। आबूरोड ब्लॉक में भी ऐसी सुविधा के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए, लेकिन किसी ठेकेदार ने आवेदन नहीं किया। सरकारी बस परिवहन सेवा के अभाव में 43 ग्राम पंचायतों के करीब 87 गांवों के लोग आज भी बस सुविधा से वंचित होने के कारण आवागमन की परेशानियों से जूझ रहे हैं। आदिवासी बहुल भाखर क्षेत्र तो पूरी तरह रोडवेज बस सुविधा से कटा हुआ है।

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प्रस्ताव भेजा, भाखर शामिल नहीं

आबूरोड आगार की ओर से कुछ दिन पहले ग्रामीण बस सेवा के लिए प्रस्ताव स्वीकृति के लिए उच्च स्तर पर भेजा गया है। इसके तहत आबूरोड से तरतोली, खड़ात, मातादेवी, ओर, डेरना, देलदर, जोड़फली, भारजा, तरूंगी, भीमाना, वाटेरा, रोहिड़ा, स्वरूपगंज, धनारी, कोदरला, बनास और कोजरा होकर पिंडवाड़ा तक अनुबंधित बस चलाना प्रस्तावित है। इससे पहले इन गांवों के अलावा आबूरोड से मूंगथला, आवल, चनार, वाजणा, भटाणा और पादर से मंडार तक बस सेवा के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे, लेकिन बसें चलाने के लिए कोई ठेकेदार नहीं मिला। नए भेजे गए प्रस्ताव में भाखर क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है।

अधिक किराया देने को विवश

किवरली गांव में हाईवे तक पहुंचने के लिए ऑटोरिक्शा की सुविधा नहीं है। ग्रामीण रोडवेज बस में यात्रा करने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर निजी वाहनों से या पैदल हाईवे तक पहुंचते हैं। यही नहीं, उन्हें अधिक बस किराया भी देना पड़ रहा है। भुजेला से किवरली आने पर उन्हें गांव से करीब चार किलोमीटर दूर तलहटी तक का किराया देना पड़ता है। वहीं किवरली पुराने टोल नाके से भुजेला जाने पर भी तलहटी से किराया वहन करना पड़ता है। पहले गांव के लोगों के लिए अहमदाबाद-जयपुर तक सुबह और शाम लोकल ट्रेन की सुविधा थी, जिसे छह वर्ष पहले कोरोना महामारी के दौरान बंद कर दिया गया था। इसके बाद से यह सुविधा दोबारा शुरू नहीं की गई।

श्रमिकों को परेशानी

ब्लॉक के गांवों से रोजाना हजारों की संख्या में श्रमिक मजदूरी के लिए आबूरोड शहर और औद्योगिक क्षेत्रों में आते हैं। ये लोग आवागमन के लिए पूरी तरह ऑटोरिक्शा पर निर्भर हैं। कई बार शाम को घर लौटने के लिए उन्हें ऑटोरिक्शा का इंतजार करना पड़ता है। मुख्य मार्ग से फलियां जुड़ी होने के बावजूद परिवहन साधनों के अभाव में उन्हें पैदल घर जाना पड़ता है।

इनका कहना है

आबूरोड से पिंडवाड़ा के बीच करीब 18 गांवों में ग्रामीण बस सेवा शुरू करने के लिए उच्च स्तर पर प्रस्ताव भेजा गया है। पूर्व में इसके लिए टेंडर निकाले गए थे, लेकिन किसी ठेकेदार फर्म ने आवेदन नहीं किया।

  • प्रवेश बोराणा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज आबूरोड आगार

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