सरकार ने तोड़ा रामपाल के सपनों का महल, स्पर्श में ठोंकी आखिरी कील, देखें वीडियो

उनकी आंखों के सामने उनके सपनों के आशियाने पर सरकार का बुलडोजर चल रहा है और वे लाचार होकर तमाशा देखने से ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं।

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May 04, 2016
rampal
सुजीत कुमार वर्मा

सीतापुर.सत्ता से बैर लेने का नतीजा क्या होता है, इसकी जीती जागती मिसाल सीतापुर के बिसवां से विधायक रामपाल यादव हैं। कभी जिनके नाम की तूती पूरे सीतापुर जिले में बोलती थी, आज वे सिस्टम के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं। उनकी आंखों के सामने उनके सपनों के आशियाने पर सरकार का बुलडोजर चल रहा था और वे लाचार होकर तमाशा देखने से ज्यादा कुछ नहीं कर सके।

सपाट मैदान में तब्दील हुआ स्पर्श होटल
स्पर्श होटल, जो सीतापुर के लिए शान का प्रतीक माना जाने लगा था। उस पर जिला प्रशासन ने बुधवार को आखिरी कील भी ठोंक दी। जिस जगह पर कभी लग्जरी गाड़ियां और वीआईपी लोगों की भीड़ लगी रहती थी, आज वहां पर सिर्फ बुलडोजर का शोर और पुलिस का दस्ता नजर आ रहा है। स्पर्श होटल सपाट मैदान में बदल गया है और उसकी शान-ओ-शौकत के किस्से सिर्फ आसपास रहने वालों के जहन में रह गए हैं।

पंचायत चुनाव से शुरू हुए रामपाल के बुरे दिन

पार्टी के खिलाफ बेटे को जिताया
इसके लिए उन्होंने ज्यादा से ज्यादा अपने समर्थकों को पार्टी से जिला पंचायत सदस्य के टिकट दिलाए और साम-दाम-दंडभेद हर गणित लगाकर जिताया भी, लेकिन पार्टी ने दूसरे उम्मीदवार को जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे नाराज रामपाल ने अपने बेटे को निर्दलीय परचा भरवा दिया। पार्टी ने उन पर बेटे का नाम वापसी का दबाव बनाया और एक डेटलाइन पर रखी, लेकिन रामपाल ने भी अपना हठ नहीं छोड़ा। इस वजह से इस दौरान उन्हें सपा से निकाल दिया गया। चुनाव के नतीजे रामपाल के पक्ष में थे, बेटे और बेटी ने सपा प्रत्याशियों को हराकर क्रमश: जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख की सीट जीत ली।

हालांकि, बाद में एमएलसी चुनाव को देखते हुए सपा में उनकी वापसी भी हो गई, लेकिन चुनाव बीतने के बाद रामपाल के बुरे दिन शुरू हो गए। वहीं, दूसरी ओर रामपाल ने भी अपने लिए दूसरे ठिकाने की तलाश में जुट गए। इससे पहले वे कोई कदम उठाते लखनऊ में उनके अवैध कॉम्प्लेक्स पर एलडीए ने कार्रवाई कर दी। इस दौरान हुए बवाल में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। इसके बाद सीतापुर में उनका होटल भी गिरा दिया गया। एक कहानी पर्दे के बाहर होती है और एक पर्दे के पीछे। रामपाल प्रकरण के पीछे की कहानी शायद कुछ और भी हो सकती है।

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Published on:
04 May 2016 05:39 pm
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