जोधपुर

आइआइटी जोधपुर के छात्रों को भारत और अमरीका की एक साथ मिलेगी डिग्री, दोनों जगह कर सकेंगे नौकरी

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्नस बिजनेस स्कूल की तर्ज पर टेक्नोलॉजी (टैक) में मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (एमबीए) पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जो देश में अपनी तरह का पहला पाठ्यक्रम है।
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IIT jodhpur students will get degree and job at foreign countries
आइआइटी जोधपुर के छात्रों को भारत और अमरीका की एक साथ मिलेगी डिग्री, दोनों जगह कर सकेंगे नौकरी

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्नस बिजनेस स्कूल की तर्ज पर टेक्नोलॉजी (टैक) में मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (एमबीए) पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जो देश में अपनी तरह का पहला पाठ्यक्रम है। दो वर्षीय पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष की पढ़ाई विदेश में होगी। इसमें विद्यार्थी को एक साथ दो डिग्री मिलेगी। एक आइआइटी जोधपुर और दूसरी विदेश में किसी यूनिवर्सिटी की। ऐसे में वह भारत या अन्य देश में आसानी से नौकरी कर पाएगा।

आइआइटी जोधपुर इसके लिए अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ करार करने पर विचार कर रहा है। अगले माह न्यूयॉर्क स्थित बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर आइआइटी जोधपुर का दौरा कर सुविधाओं का जायजा लेंगे। अगर विदेश में संबंधित यूनिवर्सिटी के छात्र भी एमबीए अंतिम वर्ष की पढ़ाई आइआइटी जोधपुर में करना चाहेंगे तो उन्हें भी यह सुविधाएं मुहैया करवाई जाएगी।

25 से 30 लाख रुपए अतिरिक्त लगेंगे
आइआइटी जोधपुर में एमबीए में कैट परीक्षा के जरिए प्रवेश होगा। इस माह के पहले सप्ताह में कैट का परीक्षा परिणाम घोषित हो चुका है और अब प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसमें बीटैक छात्र को प्रवेश दिया जाएगा। यहां कुल 60 सीट है। शुल्क करीब 8 लाख रुपए है। जुलाई में कक्षाएं शुरू हो जाएगी। द्वितीय वर्ष में छात्र अमरीका जैसे शहर में जाता है तो वहां की यूनिवर्सिटी के अनुसार उसे 25 से 30 लाख रुपए अतिरिक्त देने पडेंगे। वहां की डिग्री हासिल होने पर 3 साल जॉब वीजा मिल जाएगा। अमरीका में एमबीए का न्यूनतम वेतन 70000 डॉलर प्रति वर्ष है। अगर वह आधा भी खर्च करता है तो भी उसकी पढ़ाई का खर्चा पूरा निकल जाएगा।

इंडस्ट्री 4.0 में काम करने योग्य तैयार होंगे छात्र
आने वाला समस्य इंडस्ट्री 4.0 और वेब 3.0 का है। इसमें पूरा काम डिजिटल इको सिस्टम पर हो रहा है। वर्तमान में एमबीए करके निकल रहे छात्र इसके लिए अयोग्य है। इसी कारण हाल ही में टैक एमबीए की शुरुआत अमरीका जैसे देशों से हुई है। भारत में पहली बार यह कोर्स हम शुरू करने जा रहे हैं।
- प्रो. एमपी गुप्ता, एचओडी, एमबीए पाठ्यक्रम, आइआइटी जोधपुर

Updated on:
17 Jan 2020 04:00 pm
Published on:
17 Jan 2020 04:00 pm