खास खबर

कविता-चलो निकालें सप्ताह में एक दिन!

कविता
less than 1 minute read
Apr 17, 2022
कविता-चलो निकालें सप्ताह में एक दिन!
कविता-चलो निकालें सप्ताह में एक दिन!

डॉ. माध्वी बोरसे

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
जिसमें खुद का साथ हो,
बस खुद से बात हो,
चाहे दिन या रात हो,
कैसे भी हालात हो!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
लफ्जों पर हो कई सवाल,
यह दुनिया है या माया का जाल?
क्या पाया क्या खोया इस साल?
खुद से पूछे खुद का हाल!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
पूछें, कितना प्यार खुद से किया?
कितना दर्द गैरों को दिया?
कितना खुलकर है जिया?
कितनों का है हक लिया?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
आईने के सामने बैठें एक बार,
थोड़ी देर के लिए छोड़े शृंगार,
जाने कैसे है हमारे आचार विचार?
क्या बाकी है हम में शिष्टाचार?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
जाने, खुद को क्या है गम?
किसे ढूंढते हैं हम हरदम?
क्या सही चल रहे हैं हमारे कदम?
कैसा महसूस कर रहे हे हम?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,पूछें
क्या हमसे यह जमाना है?
जहां हर कोई बेगाना है,
बस धन दौलत ही कमाना है,
और इस दुनिया से एक दिन खाली हाथ जाना है!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,पूछें
कितनों के हमने घर बसाऐ?
कितनों के घर हमने जलाए?
इंसान बनके हम इस धरती पे आए,
इंसानियत के नाते, क्या हम कुछ कर पाए?

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन,
खुद को थोड़ा नजदीक से जानें,
खुद को सबसे ज्यादा पहचानें,
व्यस्त होने के ना करें बहाने,
खुद से मिले हुए जमाने!

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन!
चलो निकालें सप्ताह में बस एक दिन!

जुडि़ए पत्रिका के 'परिवार' फेसबुक ग्रुप से। यहां न केवल आपकी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि यहां फैमिली से जुड़ी कई गतिविधियांं भी देखने-सुनने को मिलेंगी। यहां अपनी रचनाएं (कहानी, कविता, लघुकथा, बोधकथा, प्रेरक प्रसंग, व्यंग्य, ब्लॉग आदि भी) शेयर कर सकेंगे। इनमें चयनित पठनीय सामग्री को अखबार में प्रकाशित किया जाएगा। तो अभी जॉइन करें 'परिवार' का फेसबुक ग्रुप। join और Create Post में जाकर अपनी रचनाएं और सुझाव भेजें। patrika.com

Published on:
17 Apr 2022 09:01 am