
Dholpur, शीतला विहार कालोनी में जल भराव के बीच स्कूल से घर जाते बच्चे
धौलपुर. पांच साल बाद लगने वाले मेले की जल्द शुरुआत होने वाली है। गली मोहल्लों में हाथ जोडकऱ और हर समस्याओं को सुलझाने का वादे करते हुए जनप्रतिनिधि और नुमाइंदगी करने वाले लोग आएंगे और फिर से वादों की झड़ी लगेगी लेकिन बीते तीन साल से शहरी क्षेत्र में कई कॉलोनियों में उफन रहे सीवरेज की समस्या का अभी तक निराकरण नहीं हो पाया है। हालांकि, मर्ज पुराना है लेकिन यह उफर कर बीते करीब तीन साल पहले ही ‘फोड़ा’ बनकर उभरा है, जिसका अभी तक इलाज नहीं हो पाया है। या कहें कि अभी तक शहरी सरकार इस रोग की दवा नहीं तलाश पाई है।
जी…हम बात कर रहे हैं शहर के बाड़ी, सैंपऊ, ओडेला और राजाखेड़ा बाइपास रोड इलाके की उन कॉलोनियों की जहां बिन बारिश के ही आम रास्तों पर जलभराव हो रहा है, मानो कि बारिश का पानी भरा है। सीवरेज के गंदे पानी में होकर अब स्थानीय लोगों का निकलना आम बात हो गई। लोग भी शिकायतें करके थक चुके हैं। खास बात ये है कि इन कॉलोनियों में बसे लोगों का अब ‘शहरी सरकार’ पर भरोसा डगमगा चुका है। कुछ लोग अपनी लड़ाई हाइकोर्ट से लेकर एनजीटी में लड़ रहे हैं लेकिन इसके बाद भी सीवरेज के ढक्कनों से गंदे पानी का निकलना बदस्तूर जारी है। इससे शर्मनाम बात क्या होगी कि अंतिम यात्रा को निकलने तक रास्ता नहीं है।
हर सुबह डरावनी, खेलना हुआ बंद
शहर में कई कॉलोनियों में सीवरेज का गंदा पानी हिलारें मार रहा है। सीवरेज चौक है और पानी आगे जाने की बजाय उफान मारकर बाहर निकल रहा है। गंदे पानी का सिलसिला सुबह और शाम के समय बढ़ जाता है, जब घरों का पानी आगे निकलने की बजाय घरों के सामने ही भर जाता है। शहर की शीतला विहार कॉलोनी के आम रास्तों में गंदा पानी भरा हुआ है। लोग बिना कोई शिकायत किए चुपचाप निकल जाते हैं। सुबह के समय महिलाएं और अन्य लोग छोटे स्कूली बच्चों को गंदे पानी में होकर ले जाते है। बच्चों के अभिभावक बैग कंधों और चप्पलें हाथ में लेकर आगे जाते हुए नजर आ जाएंगे। यह दृश्य रोजमर्रा के हैं। लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं है। सिस्टम भी लोगों को वो ही कहानी बताता है तो वह दो-तीन साल से सुनते आ रहे हैं। हां किरदार में बदलाव हो सकता है लेकिन कहानी लगभग वो ही है। इसी तरह का हाल शिवनगर कॉलोनी, पोखरा, आनंद नगर कॉलोनी में पीछे की तरफ, मानसरोवर कॉलोनी समेत कई कॉलोनी में लगभग एक जैसे दृश्य दिख जाएंगे।
समाधान तो दूर पर चुनने का आया वक्त...
उधर, प्रदेश में स्थानीय निकायों चुनावों की तारीखों का जल्द ऐलान होने वाला है। मैदान में आने वाले लोगों ने तैयारी कर ली है और कई जगह तो पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स भी लग चुके हैं। यह 15 अगस्त, कोई रक्षाबंधन तो कोई जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दे रहा है। लेकिन समस्याओं पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। लोगों में गुस्सा इस कदर है कि साहब आने दीजिए... खूब अभिनंदन करेंगे। एक महिला ने कहा कि जरा उन्हें भी तो मालूम हो गई गंदगी में होकर कैसे निकलते हैं, हमें तो आदत सी पड़ गई। कहा कि कई दफा तो पैर में गलाब की स्थिति बन चुकी है, खाली निकल जाती है। डॉक्टर कहना है कि गंदे पानी में नहीं जाना है लेकिन फिर कैसे जाए इसका इलाज नहीं है।
सीवरेज के साथ लोगों का गुस्सा भी मार रहा उफान!
नगर परिषद क्षेत्र में बीते तीन साल से अगर कोई प्रमुख समस्या बनकर उभरी है तो वह सीवरेज है। शहर सीवरेज बिछे तो कई साल हो गए लेकिन इसकी सफाई पर तत्कालीन नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी और अन्य लोगों ने कभी ध्यान ही नहीं दिया। परिषद के एक एक्सईएन तो प्रशासनिक अधिकारियों की सुनते और फिर निकल जाते थे। हाल ये था कि रेलवे ने शहर से होकर नवीन ब्रॉड गेज लाइन डाली लेकिन परिषद से कोई इंजीनियर और जिम्मेदार कार्य के वक्त मौके पर नहीं पहुंचे। नतीजा रेलवे ने लाइन बिछा दी और फिर बारिश हुई और जलभराव हुआ तो प्रशासन ने रेलवे इंजीनियरों को बुलाया। बैठक हुई जिस पर एक पुलिया का निर्माण बाद में हुआ। लेकिन इस तरह की समस्या रेलवे लाइन के आसपास बसी कॉालोनियों में आज भी है। शुक्र है कि इस दफा बारिश कम हुई है, नहीं तो फुल ड्रेस रिहर्सल हो जाता। सीवरेज समस्या को लेकर आमजन में काफी नाराजगी है और समय-समय पर वह आती रही है। कई वाशिदें तो कहते हैं कि अब वक्त हमारा आ रहा है, हम भी कुछ सोचेंगे...!
शिकायतें बनी ‘भोलाराम का जीव’
प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचना ‘भोलाराम का जीव’ की तरह ही शहर के सीवरेज की समस्याओं में की गई शिकायतों की स्थिति हो गई है। सरकारी तंत्र में शिकायतों का क्या हाल होता है और किस तरह आमजन संघर्ष करता है, हूबहू कहानी धौलपुर की इन कॉलोनियों में दिख जाएगी। करीब 1600 से अधिक शिकायतें आमजन से राट्रपति से लेकर पीएम, सीएम और सुप्रीम कोर्ट के जजों तक की लेकिन फिर भी धरातल पर कुछ नहीं हुआ। कई कॉलोनियों में रोज घूमने वाले मुस्कान समिति के अमित जादौन कहते हैं कि अब तो मुझे भी याद नहीं रहता है कि कौनसा परिवाद हमने किस किस को भेजा है। कहते हैं कि एनजीटी और हाइकोर्ट तक लड़ाई जारी है, देखत हैं कि क्या होता है।
Updated on:
11 Aug 2026 07:30 pm
Published on:
11 Aug 2026 07:30 pm
