जबलपुर

दशामूलारिष्ट की छह जड़ी बूटियों का अस्तित्व खतरे में!

टीएफआरआइ जबलपुर ने संरक्षण पर शुरू की रिसर्च

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The six herbs of Dashmularist's Existence is in danger

अभिमन्यू चौधरी ञ्च जबलपुर. आयुर्वेद में दर्द और सूजन के इलाज और प्रसव के बाद महिलाओं की सेहत को सामान्य करने में में कारगर मानी जाने वाली दस जड़ी-बूटियों से बनी दवा दशामूलारिष्ट के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। दवा कंपनियों की जबरदस्त मांग और अंधाधुंध दोहन के अलावा जलवायु परिवर्तन से दशामूलारिष्ट की छह जड़ी बूटियां अब जंगलों में आसानी से नहीं मिल रही हैं।

जबलपुर स्थित उष्ण कटिबंधीय अनुसंधान संस्थान (टीएफआरआइ) ने दशमूलारिष्ट में उपयोगी जड़ी बूटियों पर रिसर्च की जा रही है। मप्र विज्ञान एवं तकनीकी परिषद के प्रोजेक्ट में दुर्लभ रही औषधि पौधा स्टेटेओस्पर्मम सुआवोलेंस (पटाला) को संरक्षित करने के लिए शोध किया जा रहा है। वहीं, एक अन्य रिसर्च में प्रिस्नपर्णी और बरिहटी के राज्य के ६-८ स्थानों पर ही उपलब्ध होने की पुष्टि हुई है। इनके अलावा शिवनाक, अग्निमंथ, शालपर्णी की कमी हो गई है। बेल, गम्भरी, कंटकरी, गोखुरु भी इसमें प्रमुख औषधीय पेड़-पौधे हैं।

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पटाला के संरक्षण में काम
मप्र के जंगलों पर शोध कर रहे संस्थान के वन संवर्धन एवं प्रबंधन प्रभाग के अकाष्ठ वनोपज के वैज्ञानिक डॉ.हरिओम सक्सेना ने बताया, दशमूलारिष्ट में उपयोगी औषधियां जंगलों से लगातार घटती जा रही हैं। रिसर्च प्रोजेक्ट में पटाला के संरक्षण पर शुरू किया गया है।

पटाला और शिवनाक पर सब्सिडी
नेशनल मेडिशनल प्लांट्स बोर्ड की ओर से पटाला और शिवनाक की औषधीय खेती में सब्सिडी दी जा रही है। जानकारों के अनुसार इन औषधियों के बिना कई फॉर्मूले की गुणवत्ता कम होने की स्थिति बन सकती है। नेशनल आयुष मिशन के अंतर्गत शिवनाक की खेती में ७५ प्रतिशत, पटाला एवं प्रिस्नपर्णी में ५० प्रतिशत दी जा रही है।

१०९ औषधियों में उपयोगी
आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार दशमूलारिष्ट के फॉर्मूले से इनके अलावा १०९ अन्य औषधियां बनाई जाती हैं। इसका उपयोग दशमूला घृतम, च्यवनप्राश, ब्रह्म रसायन, अमृतारिष्ट, नारायण तेल, अवलेहा, दंतद्यारिष्ट, धनवंतरा घृतम किया जाता है।

दर्द और सूजन की दवा
संभागीय आयुष अधिकारी डॉ.जीडी द्विवेदी ने दशमूलारिष्ट की उपयोगिता पर कहा, यह महत्वपूर्ण औषधि है। शरीर में सभी प्रकार के सूजन और दर्द दूर करने की दवा है। प्रसव के बाद महिलाओं के गर्भाशय को सामान्य करने और पोषण के लिए इसकी उपयोगिता ज्यादा है। कफ, वात रोग सहित अन्य रोगों में भी उपयोगी है।

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Published on:
08 Jun 2018 07:00 am
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