
Fake 'Youth Khelo India Federation' tried scamming athletes: भारत में एक फर्जी संगठन 'यूथ खेलो इंडिया फेडरेशन' के नाम पर सक्रिय होकर देशभर के युवा खिलाड़ियों को ठगने की बड़ी साजिश सामने आई है। यह संगठन खुद को केंद्र सरकार के खेलो इंडिया कार्यक्रम, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से एफिलिएटेड बताकर खिलाड़ियों का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहा था।
एक फैक्ट चेक मे इस धोखाधड़ी का भंडाफोड़ करते हुए साफ किया गया है कि इस कंपनी का सरकार या किसी मान्यता प्राप्त खेल संगठन से कोई संबंध नहीं है। संगठन प्रत्येक खिलाड़ी से 825 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 75,000 रुपए की मांग कर रहा था। खिलाड़ियों को बताया जा रहा था कि थाईलैंड में एक अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजन होने जा रहा है, जिसमें भाग लेने के लिए यह प्रवेश शुल्क है।
'इंटरनेशनल गेम्स 2026 थाईलैंड' के नाम से जिस आयोजन का हवाला देकर खिलाड़ियों से पैसे वसूले जा रहे थे, फैक्ट चेक के अनुसार उस इवेंट का खेलो इंडिया कार्यक्रम या भारतीय खेल प्राधिकरण से कोई संबंध नहीं है। वास्तविक खेलो इंडिया गेम्स केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे एसएआई संचालित करती है। इसके तहत हर साल सर्वश्रेष्ठ 1,000 युवा खिलाड़ियों को 8 वर्षों तक सालाना 5 लाख रुपए की स्कॉलरशिप दी जाती है।
एसएआई ने स्पष्ट किया है कि खेलो इंडिया खेलों में भाग लेने के लिए किसी भी खिलाड़ी से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। यदि कोई वेबसाइट या कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए पैसे मांगे, तो वह पूरी तरह फर्जी है। एसएआई ने यह भी साफ किया है कि वह किसी भी निजी कंपनी को खिलाड़ियों से इस तरह प्रवेश शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं देती।
खेल के नाम पर खिलाड़ियों को लूटने का यह सिलसिला नया नहीं है। 2020 में भी सोशल मीडिया पर खेलो इंडिया के ही एक फर्जी विज्ञापन के जरिए देशभर के खिलाड़ियों को ठगा गया था, जिसमें उनसे खेलो इंडिया कैंप में नामांकन के लिए 6,000 रुपए ठगे गए थे। उस विज्ञापन में खेल मंत्रालय, एसएआई और खेलो इंडिया के लोगो का दुरुपयोग किया गया था, जिससे खिलाड़ियों को यह सरकारी विज्ञापन लगा। पुलिस ने कुछ समय बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। मुख्य आरोपी आगरा का एक पूर्व कबड्डी खिलाड़ी था, जो अपने साथियों के साथ सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान से काम कर रहा था।
इसी तरह, पंजाब के गुरदासपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था जो भारतीय ओलंपिक संघ और राष्ट्रीय खेल महासंघों से एफिलिएशन का झूठा दावा करते हुए ग्रामीण युवाओं से नकली टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए पैसे वसूल रहा था।