
Belgium vs Iran: फीफा विश्व कप 2026 के ग्रुप-जी में बेल्जियम और ईरान के बीच खेला गया मुकाबला बिना किसी गोल के खत्म जरूर हुआ, लेकिन मैदान पर तनाव, रफ्तार और मौके भरपूर देखने को मिले। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में हुए इस मैच में दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी, मगर 90 मिनट के बाद भी स्कोरबोर्ड पर शून्य ही बना रहा। नतीजा यह हुआ कि दोनों टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ा। इस ड्रॉ ने ग्रुप-जी की जंग को और पेचीदा बना दिया है, क्योंकि अब नॉकआउट की राह में हर अंक की अहमियत और बढ़ गई है।
बेल्जियम ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। टीम गेंद पर नियंत्रण रखना चाहती थी और ईरान की डिफेंस लाइन को लगातार दबाव में रखना चाहती थी। यही वजह रही कि मैच के बड़े हिस्से में गेंद बेल्जियम के खिलाड़ियों के पास रही। लंबे समय बाद शुरुआती एकादश में लौटे रोमेलू लुकाकू पर भी सबकी नजर थी। उनसे उम्मीद थी कि वह टीम के लिए फर्क पैदा करेंगे, लेकिन ईरान के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवंद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेल्जियम के हमलों को बार-बार नाकाम किया। लुकाकू और उनके साथियों ने कई बार गोल की तरफ रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन आखिरी क्षणों में ईरान का बचाव मजबूत साबित हुआ।
ईरान ने इस मुकाबले में थोड़ी सतर्क रणनीति अपनाई। टीम ने शुरुआत से ही अपनी डिफेंस लाइन को मजबूत रखा और मौके मिलते ही तेज जवाबी हमलों का सहारा लिया। यही रणनीति कई बार बेल्जियम के लिए परेशानी का कारण बनी। पहले हाफ में ईरान ने एक ऐसा मूव बनाया, जिससे लगा कि मैच का पहला गोल हो गया है। मेहदी तारेमी ने शानदार तरीके से गेंद को जाल में पहुंचाया भी, लेकिन ऑफसाइड के कारण यह गोल रद्द कर दिया गया। यह पल ईरान के लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन इससे टीम की आक्रामकता कम नहीं हुई। कप्तान तारेमी और हुसैन कनानी ने लगातार बेल्जियम की डिफेंस लाइन पर दबाव बनाए रखा।
मैच का सबसे अहम मोड़ 66वें मिनट में आया। बेल्जियम के नाथन नगोय को रेड कार्ड दिखाया गया और इसके बाद टीम को बाकी का मुकाबला 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। एक खिलाड़ी कम होने के बाद आम तौर पर टीम का संतुलन बिगड़ जाता है, लेकिन बेल्जियम ने खुद को संभाले रखा। हालांकि इस रेड कार्ड के बाद मैच का रुख कुछ देर के लिए ईरान की तरफ झुकता नजर आया। ईरानी टीम ने बढ़त बनाने की कोशिश भी की, मगर उसे वह एक निर्णायक मौका नहीं मिल सका, जिसे गोल में बदला जा सके।
दूसरी ओर बेल्जियम ने भी एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद हार नहीं मानी। टीम ने अपनी डिफेंस लाइन को संगठित रखा और ईरान को खुलकर खेलने का ज्यादा मौका नहीं दिया। यही वजह रही कि मैच के आखिरी मिनटों तक दोनों टीमें कोशिश करती रहीं, लेकिन कोई भी गोल नहीं निकाल सकी।